राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 7 नवंबर। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। जिले में पिछले 25 वर्षों में विभाग ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण तथा बाल संरक्षण के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
वर्ष 2000 में जिले में लगभग 300 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित थे, जो बढक़र वर्ष 2025 में 658 हो गए हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं माताओं को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन प्रयासों से जिले में कुपोषण दर में 10 प्रतिशत की कमी आई है और वर्तमान दर 11.27 प्रतिशत तक पहुँची है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत वर्ष 2017 से अब तक 15 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को लाभ प्राप्त हुआ है। वहीं मार्च 2024 से प्रारंभ महतारी वंदन योजना के तहत वर्तमान में 1.16 लाख महिलाएँ लाभान्वित हो रही हैं।
जिले में वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से 37 जोडों को लाभ मिला है। महिलाओं की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन (181) और महिला थानों की स्थापना की गई है।
नवगठित जिले में 400 महिला स्व-सहायता समूह पूरक पोषण आहार कार्यक्रम का संचालन कर रही हैं, जिससे महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं। बाल संरक्षण समिति, बाल कल्याण समिति एवं जेजे एक्ट के अंतर्गत बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत विभिन्न जनजागरूकता कार्यशालाएँ एवं स्कूल स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
विभागीय कार्यों में पारदर्शिता के लिए Poshan Tracker App के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। ऑनलाइन पोषण सर्वेक्षण और ‘पोषण प्रदर्शनी’, ‘महतारी वंदन उत्सव’ तथा ‘मातृ शक्ति सम्मान’ जैसे आयोजन विभाग की नवाचारी पहल का परिचायक हैं।
पिछले 25 वर्षों की इस यात्रा में महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले की महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाई है। निरंतर नवाचार और सेवा भाव के साथ विभाग ने सामाजिक विकास की नई मिसाल कायम की है।


