राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 7 नवंबर। दस साल से अधिक समय से लंबित प्रकरणों में श्रमिकों को न्याय मिला। श्रम न्यायालय राजनांदगांव ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
मिन उल रॉक फाइबर लिमिटेड रीवागन के मजदूर संघ के सचिव महादेव देवांगन, खेमचंद देवांगन, मोहनलाल पटेल, रतिराम वर्मा, ऋषि सिन्हा, नेमीचंद देवांगन, कुलेश्वर साहू, मन्नू साहू, अमृतलाल देवांगन, मनहरण साहू, मनोज वर्मा एवं अजय साहू ने बताया कि मिन उल रॉक फाईबर लिमिटेड रीवागहन राजनंादगांव में सन् 1990-91 से स्थापित उक्त फैक्ट्री में कार्यरत 256 मजदूर को प्रबंधन द्वारा 01 मार्च 2014 से मार्च 2015 तक के वेतन का भुगतान बिना किए व बिना किसी शासन की अनुमति प्राप्त किए बगैर फैक्ट्री को प्रबंधन संचालक आरके बदरूका निवासी हैदराबाद तेलंगाना द्वारा श्रमिकों के अन्य देयक ग्रेज्युटी, बोनस, ईपीएफ तथा छंटनी की राशि का भुगतान किए बगैर किसी उचित कारण के श्रमिकों की सेवा समाप्त कर दी गई थी और फैक्ट्री बंद कर उसमें बैंक के ऋण संबंधी प्रकरण उच्च न्यायालय बिलासपुर में लंबित रहा।
इस प्रकार विभिन्न प्रकरण के ऋण प्राप्त कर अपने फैक्ट्री को बंद कर श्रमिकों के देयकों का भुगतान न कर कंपनी द्वारा मिन उल रॉक फाईबर लिमिटेड के नाम से फाईर रॉक का सप्लाई का कार्य स्थानीय फैक्ट्री के माध्यम से आरके बदरूका द्वारा आज दिनांक तक हुए लाभ अर्जित कर रहे हैं।
मजदूर संघ के लोगों ने कहा कि श्रम निरीक्षक राजनांदगांव द्वारा वर्ष 2015 में जांच के दौरान 01 मार्च 2014 से मार्च 2016 तक के वेतन का भुगतान नहीं किए जाने पर लगभग 256 श्रमिकों के वेतन भुगतान संबंधी जांच प्रकरण तैयार कर श्रीमान अथॉरिटी अंडर पेमेंट आफ बेजेस श्रम न्यायालय राजनांदगांव (वेतन भुगतान एथोरिटी) के समक्ष प्रस्तुत किया था। जिसमें 66 प्रकरण पीडब्ल्यू एक्ट के तहत दर्ज किया गया एवं 35 प्रकरण पीडब्ल्यू एक्ट के तहत 170 श्रमिकों के वेतन भुगतान समय पर नहीं किए जाने के कारण श्रम न्यायालय पीठासीन अधिकारी अमित जिन्दल द्वारा संपूर्ण प्रकरण का विचारण कर 35 प्रकरणों में 10 सितंबर 2025 से लगातार आदेश पारित कर पेमेंट ऑफ बेजेस एक्ट के तहत बिना भुगतान के वेतन का 10 गुना पेनाल्टी सहित लगभग करोड़ों रुपए का वेतन आदेश दिनांक से 15 दिवस के भीतर अनावेदक के संस्थान मिन उल रॉक फाईबर लिमिटेड के संचालक आरके बदरूका को श्रमिकों को भुगतान किए जाने का आदेश पारित किया गया है। उपरोक्त प्रकरण में निर्णय के पश्चात श्रमिकों में हर्ष व्याप्त है।


