राजनांदगांव
महापंचायत की बैठक में महाराष्ट्र-मप्र के सामाजिक पदाधिकारी जुटे, 15 नवंबर को प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 27 अक्टूबर। मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट को भंग करने का मामला तूल पकड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट की रूपरेखा और कार्यप्रणाली को लेकर आदिवासी समाज मुखर अंदाज में ट्रस्ट को लगातार भंग करने की मांग कर रहा है।
अपनी मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज कलेक्टर जितेन्द्र यादव से भेंट कर भंग की वैधानिकता को लेकर सवाल उठाए हैं। समाज का आरोप है कि तथाकथित लोगों ने ट्रस्ट पर कब्जा किया हुआ है। जबकि मां बम्लेश्वरी आदिवासी समाज की कुलदेवी है। ऐसे में समाज को ट्रस्ट में जगह देने पर मौजूदा सदस्य मांग को खारिज करते रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर 15 नवंबर को सर्वआदिवासी समाज ने प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने की घोषणा की है।
मिली जानकारी के मुताबिक सर्व आदिवासी समाज द्वारा कुछ प्रमुख मांगों के साथ ट्रस्ट को भंग करने की प्रशासन से मांग की है। कलेक्टर से मुलाकात के दौरान समाज ने जानकारी देते बताया कि मां बम्लेश्वरी आदिवासियों की देवी है। पूर्व में गोंड आदिवासी परंपरा से ही मंदिर में पूजा होती थी। बदलते समय के साथ ट्रस्ट पर गैर आदिवासी समुदाय के लोगों का कब्जा हो गया। मंदिर ट्रस्ट के चुनाव में आदिवासी समुदाय को नेतृत्व देना भी उचित नहीं समझा गया।
समाज के प्रदेश सचिव विनोद कुमार नागवंशी एवं अन्य पदाधिकारियों ने कलेक्टर से सीधे ट्रस्ट की मौजूदा संरचना और कार्यप्रणाली पर रोक लगाते भंग करने की मांग की है। कलेक्टर ने समाज को उचित हल ढूंढने का भरोसा दिया है। समाज का कहना है कि मां बम्लेश्वरी की पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व के चलते सामाजिक जुड़ाव है। प्रदेश सचिव नागवंशी का कहना है कि अब आदिवासी अपने हक के लिए सडक़ में उतरकर लड़ाई लडऩे तैयार है। पूरा समाज एकजुट होकर 15 नवंबर को आंदोलन करेगा।
उधर आदिवासी समाज पर धार्मिक सौहार्द्र बिगाडऩे का भी आरोप लगा है। जिसका समाज ने पूरी तरह से खंडन किया है। समाज के लोगों का कहना है कि मौजूदा दौर में आदिवासियों की संपत्ति, संसाधन और रीति-रिवाज को एक तरह से क्षति पहुंचाई जा रही है। संसाधन की लूट मची हुई है। समाज हमेशा से शांतिप्रिय व्यवहार के साथ आगे बढऩे में विश्वास रखता है। समाज के लोगों ने हिन्दू धर्म विरोधी होने के आरोप को भी खारिज किया है। आदिवासी समाज ने डोंगरगढ़ मंदिर ट्रस्ट को फौरन भंग करने की मांग को जायज ठहराया।


