राजनांदगांव
दुर्ग जेल अधीक्षक जांच के लिए जेल पहुंचे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 15 सितंबर। राजनंादगांव जिला जेल में एक बंदी पर कातिलाना हमला करने की घटना की विभागीय जांच शुरू हो गई है। 11 सितंबर को प्रतिबंधात्मक धारा के तहत जेल में बंदी रहे युवक पर एक गुट के कुछ लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस घटना की विभागीय जांच का जिम्मा दुर्ग जेल अधीक्षक को सौंपा गया है। रविवार को दुर्ग जेल अधीक्षक मनीष सांभरकर ने जेल पहुंचकर घटना की विस्तृत जानकारी लेते हुए मौके का मुआयना किया। विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
मिली जानकारी के मुताबिक तुलसीपुर के रहने वाले युवराज राजपूत पर 11 सितंबर की सुबह 3 से 4 युवकों ने उस वक्त पर हमला कर दिया, जब वह बैरक से बाहर निकल रहा था। युवराज राजपूत के खिलाफ हाल ही में प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक 151 की धारा के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा था। सूत्रों का कहना है कि जेल में रोहन गणवीर व जीशांत नामक बंदियों से पुरानी रंजिश के चलते तनातनी हो गई।
मौका देखकर दोनों आरोपियों ने अपने अन्य दो बंदियों के साथ मिलकर युवराज पर स्टील गिलास से बने धारदार कटर से हमला कर दिया। जिससे उसके चेहरे में गंभीर चोट पहुंची। साथ ही उसके पीठ पर भी वार किए गए। सूत्रों का कहना है कि जेल में दाखिले के दौरान घायल बंदी को बैरक नं. 8 में भेजा गया था, लेकिन वह आरोपियों के बैरक नं. 7 में घुस गया। इसी दौरान इनमें पुरानी दुश्मनी के चलते झगड़ा हुआ और मौका देखकर आरोपियों ने युवराज पर कातिलाना हमला कर दिया।
इधर इस घटना की जांच के लिए राज्य जेल प्रशासन ने दुर्ग जेल अधीक्षक को जिम्मेदारी दी है। जांच अधिकारी सांभरकर ने घटना को लेकर बैरक में मौजूद अन्य बंदियों से बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने घटना में प्रयुक्त हथियार को भी देखा। बताया जा रहा है कि जेल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच अधिकारी नियुक्त किया। कहा जा रहा है कि जेल में हुई घटना पूर्व प्रायोजित नहीं थी, लेकिन यह सच है कि आरोपियों का जेल से बाहर घायल बंदी के साथ मोहल्ले स्तर का विवाद था। आरोपी में से एक जीशांत के पिता को अक्सर घायल बंदी द्वारा मोहल्ले में प्रताडि़त किया जा रहा था। इसी बात को लेकर आरोपी ने साथियों संग अपनी भड़ास निकाली।


