राजनांदगांव
धूमधाम से मनाया गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 6 सितंबर। जश्ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस शानो शौकत के साथ शुक्रवार को निकाला गया। जुलूस में मोहम्मद साहब के आशिकों का भारी जन सैलाब था।
मुस्लिम समाज के अध्यक्ष रईस अहमद शकील ने बताया मोहम्मदी जुलूस में लोग दुरुद शरीफ , सलातो सलाम पढ़ते हुए चल रहे थे। इसके साथ ही हर किसी की जुबां पर नबी की आमद मरहबा के नारों की गूंज थी। परचम कुसाई. मीलाद के बाद मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं की गई। सभी एरिये के लोग जुलूस की शक्ल में जामा मस्जिद में इक्कठा होकर जुलूस भारत माता चौक, गंज चौक, लोहारपारा, कासीई मोहल्ला, रामाधीन मार्ग, कामठी लाइन, गुड़ाखू लाइन, आजाद चौक, मानव मंदिर चौक होते हुए इस्लाम चौक जूनीहटरी में समापन हुआ।
रईस अहमद शकील ने कहा कि हमें चाहिए हम अपने नबी के बताए हुए रास्ते पर चले और इस मिलादुन्नबी में हम ये अहद करें कि अखलाक एवं भाईचारे को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और इंसानियत के साथ मुल्क में शांति को बढ़ावा देते नफरत फैलाने और समाज को तोडऩे वाले लोगों का बहिष्कार करें। जुलूस में समाज के बड़े-बुजुर्ग, बच्चे, युवा प्रमुखता से मौजूद रहे।
नवयुवक मंडल ने जुलूस का किया स्वागत
नवयुवक मंडल के प्रकाश जैन, सनद विश्वकर्मा, रितेश यादव, संजीव कसार, संजय वाडेकर, गोली कसार आदि पदाधिकारी व सदस्यों ने मोहम्मदी जुलूस का स्वागत किया। श्री शकील ने कहा ईद-मिलादुन्नबी पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, जो उनके जीवन, शिक्षाओं और मानवता को समर्पित संदेश को याद करने का पर्व है। इस 1500 वर्षों के गौरवशाली इतिहास के मौके पर मस्जिदों, इस्लामी धर्म स्थलों और समाजिक संस्थाओं में विशेष दुआएं, नात-ए-शरीफ़ व साथ ही गरीबों और जरूरतमंदों में खाना और कपड़े भी वितरित किए जाते है, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ाते हैं, इसलिए इस पर्व का उल्लास भारत के सभी समुदायों के बीच प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाए हुए हैं। प्रशासन ने भी इस दिन सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करते कार्यक्रमों के सुचारू संचालन का इंतजाम किया था। 1500 वर्षों की यात्रा। जिसमें पैगंबर साहब के आदर्श और सच्चाई की मिसाल आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जो इस उत्सव को विशेष बनाती है। देशभर के मुसलमान समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी इस पर्व में हिस्सा लेकर एकता और सहिष्णुता का संदेश देते हैं।


