राजनांदगांव
इंद्रशाह को जीत दिलाने प्रभारी आफताब की रणनीति रही सफल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 5 दिसंबर। अनुसूचित जनजाति की एकमात्र आरक्षित मोहला-मानपुर विधानसभा सीट के चुनावी मोर्चे में संजीव शाह पूरी तरह से फेल रहे, वहीं इंद्रशाह को जीत दिलाने के लिए जिला संगठन के प्रभारी आफताब आलम की रणनीति कामयाब रही।
नक्सलग्रस्त इस सीट पर हिंसा की परवाह छोडक़र आलम की टीम ने दूरस्थ इलाकों के मतदाताओं को कांग्रेस से जोडऩे के लिए पूरी ताकत झोंक दी। नतीजे के तौर पर कांग्रेस की झोली में यह सीट आ गई। भाजपा के संजीव शाह को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया।
इंद्रशाह मंडावी ने ३१ हजार वोट बटोरकर नया रिकार्ड बनाया। वजह यह है कि कांग्रेस ने सांगठनिक स्तर पर शानदार तैयारी की थी। आफताब आलम ने कुछ असंतुष्ट नेताओं को भी मनाकर पार्टी के पक्ष में प्रचार की जिम्मेदारी दी।
ज्ञात हो कि मोहला-मानपुर जिले की करीब ७० बूथ खुज्जी विधानसभा के अधीन है। इन बूथों पर कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली। भोलाराम साहू को इन बूथों में भी कामयाबी मिली। इस तरह आलम ने दोहरी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया। इस सफलता के मायने इसलिए भी है कि चुनाव के दौरान नक्सलियों ने भाजपा कार्यकर्ता बिरजू तारम की जघन्य हत्या कर दी थी। ऐसे में औंधी इलाके में प्रचार करना जोखिम से कम नहीं था। जान हथेली में लेकर इंद्रशाह मंडावी और आफताब आलम ने संयुक्त रूप से सभाएं और प्रचार कर पार्टी को विजयी बनाने कोई कसर नहीं छोड़ी।
भाजपा के उम्मीदवार संजीव शाह लगभग हर मोर्चे पर पिछड़ गए। २०१८ के चुनाव की तुलना में इंद्रशाह मंडावी ने १० हजार वोट ज्यादा मिले। वह पिछले विस चुनाव में २१ हजार ८०० मतों से विजयी हुए थे। मौजूदा चुनाव में यह आंकड़ा ३१ हजार ७४१ पहुंच गया।



