रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 17 जून। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने सभी विधायकों को पत्र लिखकर विधानसभा के मानसून सत्र में सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम बनाने की मांग की है। डॉ. मिश्र ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जाति और समाज के नाम पर पंचायतें मनमाने फैसले थोप रही हैं। जाति-समाज से बाहर शादी करने, पंचायत का आदेश न मानने, स्वच्छता मित्र बनने या आरटीआई लगाने जैसे कारणों से पूरे परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में जशपुर में 1 परिवार, कोंडागांव में 1 परिवार, केशकाल में 10 परिवार, सरायपाली में 5 परिवार, बगीचा-कांसाबेल में 1 परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया गया। डॉ. मिश्र के अनुसार पूरे छत्तीसगढ़ में 30 हजार से ज्यादा लोग इस सामाजिक कुरीति का शिकार हैं।
सामाजिक बहिष्कार झेल रहे परिवार को गांव में बेहद मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ता है। कोई बात नहीं करता, पानी लेने, नहाने, किराना खरीदने, मजदूरी करने या शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने तक की मनाही हो जाती है। कई बार पंचायतें बहिष्कार हटाने के नाम पर भारी जुर्माना, अनाज या गांव छोडऩे का फरमान भी जारी कर देती हैं।
इसके परिणामस्वरूप कई जगहों पर आत्महत्या, हत्या, प्रताडऩा और पलायन की घटनाएं हो रही हैं। दुर्भाग्यवश, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और राज्य सरकार के पास इन मामलों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं है।
डॉ. दिनेश मिश्र ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 11 अप्रैल 2016 को सर्वसम्मति से सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम पास किया गया था, जिसे 3 जुलाई 2017 से लागू कर दिया गया। उन्होंने मांग की है कि छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह का सशक्त कानून बनाया जाए ताकि पीडि़तों को न्याय मिल सके और ऐसी कुरीति पर अंकुश लगे।


