रायपुर

फेडरेशन ने अपनी 11 मांगे बजट में शामिल करने कहा, वर्ना आंदोलन करेंगे
23-Feb-2026 7:34 PM
फेडरेशन ने अपनी 11 मांगे बजट में शामिल करने कहा, वर्ना आंदोलन करेंगे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 23 फरवरी। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अपनी  लंबित 11 सूत्रीय मांगों को आगामी बजट में इन सभी मांगों को प्राथमिकता से शामिल करने की मांग की है। संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि कर्मचारी और अधिकारी वर्ग ही शासन की रीढ़ हैं - यदि उनका सम्मान और हित सुरक्षित रहेगा, तभी प्रदेश की विकास योजनाएं प्रभावी ढंग से धरातल पर उतरेंगी। श्री वर्मा ने सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा करते हुए कहा कि यदि बजट में हमारी मांगों को शामिल नहीं किया गया तो फेडरेशन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने  बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि इनके लिए फेडरेशन चरणबद्व आंदोलन करता रहा है। अधिकतर मांगें मोदी की गारंटी में शामिल है।हम कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों का वैधानिक और नैतिक अधिकार की बात कह रहे हैं।

प्रमुख मांगे:-मोदी की गारंटी अनुसार  केंद्र  के समान देय तिथि से राज्य में भी डीए डीआर,  2019 से लंबित  एरियर्स की राशि जीपीएफ में जमा कराएं। वेतन विसंगतियों को दूर करने पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। चार स्तरीय पदोन्नत समयमान वेतनमान क्रमश: 8,16,24,32 वर्ष में दिया जाए।सहायक शिक्षकों  सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को भी त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान।  निकाय के कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति। प्रदेश में कैशलेस सुविधा लागू की जाए।

अनुकंपा नियुक्ति नि:शर्त लागू करने स्थायी आदेश और  10 प्रतिशत सीलिंग समाप्त कर सीधी भर्ती के समस्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति दिया जाए। अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस। प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए समस्त सेवा लाभ, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण।  अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष। कार्यभारित, दैवेभो,अनियमित,संविदा कर्मियों का नियमितीकरण।

 

स्थापना व्यय में वृद्धि की जाए-झा

रायपुर, 23 फरवरी।   कर्मचारी नेता विजय कुमार झा ने वित्त मंत्री से मांग की है कि छत्तीसगढ़ राज्य के बजट में  स्थापना व्यय में अधिक राशि का प्रावधान करने की मांग की है। श्री झा ने कहा है कि प्रदेश में केंद्रीय कर्मचारियों के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता देने,समय पर पेंशनरों को महंगाई भत्ता देने, मध्य प्रदेश की भांति छत्तीसगढ़ में  नियमितीकरण करने, रोजगार के अवसर व्यवस्थित करने, किसानों के धान के बकाया राशि के भुगतान करने जैसे अनेक समस्याएं हैं। जिनके लिए बजट में अधिक प्रावधान करने की आवश्यकता है। प्रदेश का कर्मचारी इस बजट में यह अपेक्षा करता है कि उनके 32 माह के लंबित महंगाई भत्ता एरियस, एनपीएस में जमा राशि की वापसी तथा तीन पेंशन व्यवस्था को बंद कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने में राजकीय कोष में व्यय भार बढ़ेगा। इसलिए स्थापना व्यय में पर्याप्त राशि की व्यवस्था होनी चाहिए।  दूसरी ओर जो सुविधा या आर्थिक लाभ केंद्रीय बजट में प्रस्तावित है, उसे राज्य में लागू नहीं किया जा रहा है। कुल मिलाकर श्री झा ने वित्त मंत्री से मांग की है कि बजट के नाम पर आपदा में अवसर ढूंढने वालों पर कढ़ाई की जानी चाहिए।


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