रायपुर

रामकृष्ण केयर में प्रदेश का पहला एबीओ-इनकम्पैटिवल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट सफल
10-Feb-2026 7:58 PM
रामकृष्ण केयर में प्रदेश का पहला एबीओ-इनकम्पैटिवल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट सफल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 10 फरवरी। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए छत्तीसगढ़ का पहला एबीओ-इनकम्पैटेिबल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में सबसे दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा प्रक्रियाओं में से एक माना जा रहा है, जो इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता में एक बड़ा कदम है।

डेढ़ साल का यह शिशु जन्म से ही पीलिया, पेट में पानी भरना, गंभीर लिवर क्षति, संक्रमण और अत्यंत कम होमोग्लोबिन स्तर जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद डॉक्टरों ने पहले संक्रमण को नियंत्रित किया और फिर लिवर ट्रांसप्लांट को बच्चे के लिए एकमात्र जीवनरक्षक विकल्प के रूप में पहचाना। दोनों माता-पिता अपने लिवर का दान करने के लिए तैपार थे, लेकिन रक्त समूह मेल न खाने के कारण पारंपरिक लिवर ट्रांसप्लांट संभव नहीं था। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में मेडिकल टीम ने एबीओ-इनकम्पैटिबल लिवर ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया यह प्रक्रिया अत्यंत जोखिमपूर्ण और दुर्लभ होती है, विशेषकर इतने छोटे बच्चों में।

मामले की जटिलता इस तथ्य से और बढ़ गई कि बच्चे की रक्त नलिकाएं बेहद छोटी और नाजुक थी, जिससे सर्जिकल पुनर्निर्माण अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया। इसके बावजूद, विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने उन्नत तकनीक और उच्च स्तरीय सर्जिकल विशेषज्ञता के साथ लैप्रोस्कोपिक पद्धति का उपयोग करते हुए इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसमें पिता ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया।

सर्जरी के बाद बच्चे को अस्थायी श्वसन संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ा, जिसके लिए ब्रोंकोस्कोपी की आवश्यकता हुई। समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप, उन्नत दवाओं और निरंतर निगरानी के साथ बच्चे की स्थिति तेजी से सुधरी और कुछ ही दिनों में शिशु को स्वस्थ और स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने वाले मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल की वास्तविक ताकत एक बार फिर रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में देखने को मिली।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स के मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने कहा, यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अब छत्तीसगढ़ और मध्य भारत में अत्यंत उन्नत और जटिल चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। परिवारों को जीवनरक्षक पीडियाट्रिक ट्रांसप्लांट के लिए अब लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं है। यह सफलता हमारी पूरी मेडिकल टीम की प्रतिबद्धता, अनुभव और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाती है।

एस्टर इंटीग्रेटेड लिवर केयर इंस्टीट्यूट के सीनियर कंसल्टेंट लिवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी एवं ट्रांसप्लांटेशन डॉ. सोनल अस्थाना ने कहा, 'एबीओ-इनकम्पैटिबल लिवर ट्रांसप्लांट में इम्यूनोलोजिकल मैनेजमेंट सबसे बड़ी चुनौती होती है, विशेषकर पीडियाट्रिक मरीजों में। ऐसे ट्रांसप्लांट में इम्यूनोलॉजिकल जोखिम काफी अधिक होते हैं, जिससे सफल परिणाम दुर्लभ हो जाते हैं। सख्त प्री-ट्रांसप्लांट प्रोटोकॉल, सावधानीपूर्वक तैयारी और मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण के माध्यम से हम इस जटिल प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा कर सके।

 

सीनियर कंसल्टेंट - लिवर ट्रांसप्लांट एवं एचपीबी सर्जरी डॉ. वचन एस. हुकेरी ने कहा, सर्जरी के हर चरण में अत्यधिक सावधानी और सटीकता की आवश्यकता थी क्योंकि शिशु की रक्त नलिकाएं बहुत छोटी और नाजुक थी। सटीक सर्जिकल योजना और टीमवर्क के माध्यम से हम इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर सके।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, रायपुर के कंसल्टेंट हेपाटोबिलियरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. हितेश दुबे ने कहा, इतने छोटे बच्चे में एबीओ-इनकम्पैटिबल पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। सटीक योजना, आधुनिक तकनीक और टीमों के बीच मजबूत समन्वय के साथ यह सर्जरी सफल रही। बच्चे का सुचारु रूप से स्वस्थ होना हमारे लिए सबसे संतोषजनक परिणाम है।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, रायपुर के पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. पवन जैन ने कहा, ऐसे मामलों में प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। निरंतर निगरानी और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से यह सुनिश्चित किया गया कि बच्चा अब पूरी तरह स्थिर और स्वस्थ है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों के संयुक्त प्रयास, उन्नत तकनीक और समर्पित देखभाल के साथ यह बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है, जो न केवल परिवार बल्कि पूरे राज्य के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बन गया है।


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