रायपुर
रायपुर, 4 फरवरी। निजी अस्पताल संचालकों ने डीजीपी अरूण देव गौतम और गृह सचिव हिमशिखर गुप्ता को एक पत्र सौंपा है। इसमें अस्पतालों के लिए फायर एनओसी के प्रावधानों के युक्तिकरण का आग्रह किया है। एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डा राकेश गुप्ता ने कहा कि 25 नवंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार छत्तीसगढ़ में डॉक्टर के एकल क्लिनिक से लेकर बड़े अस्पताल को अग्निशमन विभाग द्वारा अधिकृत तृतीय पक्ष अंकेक्षक (थर्ड पार्टी ऑडिटर) से निरीक्षण पश्चात फायर एनओसी लेना और प्रति वर्ष नवनीकरण करवाना अनिवार्य है। थर्ड पार्टी ऑडिटर द्वारा लगभग 10 रूपए वर्ग फुट (जीएसटी शुल्क अलग) नर्सिंग होम और चिकित्सक संस्थानों से लिया जा रहा है। औसत 200 बिस्तर अस्पताल के लिए प्रतिवर्ष 4 लाख रूपए प्रति वर्ष नवीनीकरण शुल्क इस पर आयेगा जिसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता है। बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लिनिक, नर्सिंग होम, अस्पतालों को नर्सिंग होम एक्ट के तहत संचालन का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं दिया जा रहा है जबकि राज्य नर्सिंग होम एक्ट का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा संबंधी गुणवत्ता पर ध्यान देना है।


