रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 24 जनवरी। गुप्त नवरात्रि पर पुरानी बस्ती स्थित श्री महामाया देवी मंदिर में जारी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन आचार्य वागीश महाराज ने कहा कि किचन में 24 घंटे किच किच होता है। यदि उसे रसोई घर बना ले, तो 24 घंटा रस मिलेगा। रसोई घर को अन्नपूर्णा का घर, महामाया का घर बनाओ वहां बनने वाला भोजन प्रसाद बन जाएगा। रसोई का प्रसाद समूचे परिवार का भविष्य है, जैसा अन्न होगा वैसा मन होगा। जैसा पानी है वैसी वाणी है। अन्न बिना भोग लगाएं नहीं करना चाहिए। बिना भोग लगाएं भोजन विष बन जाता है। प्रसाद ही प्रभु की प्रसन्नता है। भोजन में तुलसी डाल दो तो प्रसाद बन जाता है। ठाकुर जी की सेवा मनसा वाचा कर्मणा करना चहिए?।
महाराज श्री ने महाकाली, महालक्ष्मी, महा सरस्वती का वर्णन करते हुए तीनों के तेज पूर्ण ही राधा है। योग माया ही महामाया है। श्री कृष्ण ने महा लीला किया, तब उन्होंने योग माया का आश्रय लिया। योगमाया ही महामाया है। इसलिए प्रभु का आश्रय लिया है। वृंदावन में महामाया योग माया ही श्री राधा है। उन्होंने श्री कृष्ण से राधा जी को 11 महीने 15 दिन बड़े होने का रहस्य उद्घाटित किया। राधा जी के जन्म के बाद 11 महीने 15 दिन तक उनकी आंखें नहीं खुली। सब कुछ करने के बाद भी बड़े-बड़े बैद्य बुलाए गए। जन्म हुआ किंतु नेत्र नहीं खुला। जब प्रभु का जन्म हुआ और उन्हें पालने में लेकर प्रभु के दर्शन के लिए ले गए तब श्री राधा ने श्री कृष्ण का दर्शन किया और उसी दिन राधा जी के आंखें खुली। आज भी विंध्याचल में विंध्यवासिनी के रूप में योग माया विराजमान है। नंद बाबा ने सात तिल का पहाड़ बनाया। जिसमें हीरा मोती जवाहरात सोना आदि छुपा कर रखें और उसे ही दान किंए? महाराज श्री ने कहा दान गुप्त रूप से होना चाहिए। प्रचार प्रसार किया गया दान सफलीभूत नहीं होता।


