रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 11 जुलाई। जब आपके सभी संसाधन फेल हो जाएं वहां धर्म की श्रद्धा ही काम आती है क्योंकि श्रद्धा और आशीर्वाद का कोई मापदंड नहीं है। बच्चों को उनके बचपन से ही प्रार्थना करना सिखाना हम सबकी जिम्मेदारी है। वैसे तो बच्चे स्कूल में प्रेयर करते ही हैं। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में मंगलवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को रात 10 बजे के बाद मोबाइल का उपयोग नहीं करने का संकल्प भी दिलाया।
साध्वी ने कहा कि आज यह केवल बोलने की बात हो गई है कि टीवी मोबाइल में सब को बिगाड़ दिया है ऐसा कोई नहीं बोलता कि टीवी और मोबाइल ने मेरी जिंदगी संवार दी। अब आप खुद सोचिए कि आप खुद अपने मुंह से कह रहे हैं कि टीवी और मोबाइल हमारे बच्चों को बिगाड़ रहे हैं तो खराब क्या है टीवी और मोबाइल। जब आपके घर में सब्जी, दूध और भोजन खराब हो जाता है तो आप उसे फेंक देते हो तो आप अपने घर से टीवी और मोबाइल को क्यों नहीं फेंक देते। आप अपना उत्थान और बच्चों का भविष्य बनाना चाहते हैं तो इन्हें दूर रखें। आप अपने बच्चों को गलत संगति से तो बचा सकते हैं लेकिन टीवी और मोबाइल से नहीं।
साध्वी ने कहा कि जब आप बच्चे को नहीं समझा सकते तो उन्हें टीवी और मोबाइल दे देते हो और जब यह उनकी आदत पड़ जाए तो आप कहते हो कि साध्वीजी बच्चे बिगडऩे लगे हैं। पहले दुकान-व्यापार में पुरुष सदस्य काम करते थे लेकिन अब यह दुर्भाग्य की बात है कि आज सभी जगह दुकानों में लड़कियां काम कर रही हैं। सडक़ पर चलते समय आपको बड़े-बड़े ऐसे बोर्ड दिखते होंगे जिसमें बड़ी-बड़ी हीरोइन और मॉडल उत्पादों के विज्ञापन में नजर आते है। यह विकार-वासना को आमंत्रण देने जैसा है। इससे मोहिनी तंत्र का उदय होता है और विकार-वासना उत्पन्न होती है। युवक-युवतियां आपस में संपर्क में आते हैं और उनके बीच प्यार जागृत होने लगता है। यह प्यार अंधा होता है, आप कितना भी युवाओं को समझाएं वह नहीं समझेंगे। यह पागलपन 4 दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात जैसी बात है।
साध्वीजी कहती है कि आज तो बिना एक दूसरे से मिले सोशल मीडिया में फोटो देख कर ही युवा आपस में दोस्ती और शादी रचा रहे हैं। पहले के दिनों में माता-पिता रंग और रूप नहीं देखे थे वह खानदान और व्यवहार देखकर ही लडक़ी पसंद करते थे। ऐसे रिश्ते भी कभी तलाक सीमा तक नहीं पहुंचते थे। आज वह युवा जो खुद की पसंद से शादी कर रहे है, वह 2 महीने बाद तलाक के लिए दौडऩे लगते हैं।


