रायपुर
दैवेभो से नियमित हुए को ऊपर रखा, सीधी भर्ती वाले नीचे!
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 30 सितंबर। पीडब्ल्यूडी में दैनिक वेतनभोगी से नियमित किए गए उप अभियंताओं को सीधी भर्ती से आए उप अभियंताओं से वरिष्ठताक्रम में ऊपर रखे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि अभी तक विधिवत आदेश जारी नहीं हुए हैं, लेकिन ईएनसी की कमेटी ने इस आशय की सिफारिश की है।
ईएनसी की सिफारिश की खबर छनकर बाहर आने के बाद पीडब्ल्यूडी में उप अभियंताओं का एक बड़ा खेमा काफी खफा है, और इसको लेकर आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार कर रहा है। बताया गया कि अविभाजित मध्यप्रदेश में पीडब्ल्यूडी में डिप्लोमा इंजीनियरों को मस्टररोल पर रखा गया था, और फिर बाद में नियमित भी हो गए।
नियमितीकरण के बाद वरिष्ठता के निर्धारण को लेकर किचकिच चल रही है। इस सिलसिले में उप अभियंता प्रशांत सरकार की याचिका के आधार पर वरिष्ठता के नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कोरोना की वजह से इस प्रक्रिया में विलंब हुई है, और ईएनसी की कमेटी ने नियमित हुए उप अभियंताओं को ऊपर रखने की सिफारिश की। इससे दो सौ से अधिक उप अभियंता प्रभावित हो रहे हैं। जो कि सीधी भर्ती से आए थे। इसमें 90 फीसदी अनुसूचित जाति, और जनजाति संवर्ग के हैं।
सीधी भर्ती से आए उप अभियंताओं का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी के ईएनसी द्वारा मप्र शासन कार्मिक सुधार एवं प्रशिक्षण विभाग भोपाल (वेतन आयोग प्रकोष्ठ) के पत्र 24 नवंबर 1987, 24 दिसंबर 1988, 18 मई 1989, 19 जनवरी 1990 के संदर्भ का हवाला देते हुए दैनिक वेतन दर पर रखे लोगों को नियमित करने के विभिन्न परिपत्रों के जरिए से वरिष्ठता को गलत ढंग से व्याख्या करते हुए अभिमत दिए है। जो कि अपने आप में पूरी तरह असत्य है।
उन्होंने बताया कि सभी पत्रों में बार-बार मप्र शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश हंै कि कुल रिक्त पदों के 50 फीसदी सीधी भर्ती के लिए आरक्षित रखते हुए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के वरिष्ठता के आधार पर शेष रिक्त पदों पर आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए नियमित किया जाए, और उनके वरिष्ठता पहले से सीधी भर्ती से आए हुए उप अभियंताओं के नीचे रखने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए। बावजूद इसके ईएनसी ने नजर अंदाज कर दिया है। बहरहाल, मामला आने वाले दिनों में गरमाने के आसार हैं।


