रायगढ़
अविवाहित बताकर प्रेमजाल में फांसने का आरोप
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायगढ़, 14 जून। आरोपी ने युवती को शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया था तथा बाद में विवाह से इंकार कर दिया था। प्रार्थी की रिपोर्ट पर आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
प्रकरण में थाना धरमजयगढ़ क्षेत्र की रहने वाली 22 वर्षीय युवती ने 11 जून को थाना पूंजीपथरा में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर रिपोर्ट दर्ज कराई। पीडि़ता ने बताया कि फरवरी 2025 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से उसकी पहचान सागर सारथी (25), से हुई थी। बातचीत के दौरान आरोपी ने स्वयं को अविवाहित बताया और तराईमाल स्थित प्लांट में कार्यरत होना बताया। आरोपी लगातार युवती को पत्नी बनाकर रखने और विवाह करने का आश्वासन देता रहा।
पीडि़ता के अनुसार, 23 जुलाई 2025 को आरोपी ने उसे फोन कर तराईमाल बुलाया और मजदूर क्वार्टर में ले जाकर पत्नी बनाकर रखने का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किया। इसके बाद आरोपी लगातार उसे अपने क्वार्टर में पत्नी की तरह रखकर उसका दैहिक शोषण करता रहा। अगस्त 2025 में जब युवती गर्भवती हो गई, तब आरोपी ने उसका पालन-पोषण नहीं कर पाने की बात कहते हुए उसे उसके घर धरमजयगढ़ भेज दिया।
पीडि़ता ने बताया कि इसके बाद भी आरोपी उसके घर आता-जाता रहा और विवाह करने की बात करता रहा। जब पीडि़ता ने आरोपी से अपने साथ रखने की बात कही, तब आरोपी ने बताया कि उसकी पहली पत्नी गर्भवती है तथा उसका पीडि़ता से कोई संबंध नहीं है। आरोपी ने पीडि़ता से अपने परिजनों द्वारा कहीं अन्यत्र विवाह करा देने की बात कहने को कहा तथा नहीं तो जान से मारकर फेंक देने की धमकी भी दी।
पीडि़ता की रिपोर्ट पर थाना पूंजीपथरा में धारा 69 एवं 351(3) बीएनएस के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महिला पुलिस अधिकारी द्वारा पीडि़ता का कथन दर्ज कराया गया तथा उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए तत्काल टीम गठित कर दबिश दी गई। पुलिस टीम ने आरोपी को सिंघल पावर प्लांट लेबर कॉलोनी, तराईमाल से हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी सागर सारथी ने पीडि़ता के साथ प्रेम संबंध होने तथा उसे गर्भवती करने की बात स्वीकार की।
आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया तथा उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।


