रायगढ़

अष्टमहालक्ष्मी मंदिर वैष्णवी धाम पंडरीपानी में कलश स्थापना व वेदी पूजन, तीन दिनी वार्षिकोत्सव
03-Dec-2025 10:17 PM
अष्टमहालक्ष्मी मंदिर वैष्णवी धाम पंडरीपानी में कलश स्थापना व वेदी पूजन, तीन दिनी वार्षिकोत्सव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायगढ़, 3 दिसंबर। माँ अष्टमहालक्ष्मी मंदिर वैष्णवी धाम,पंडरीपानी ( पूर्व) रायगढ़ में द्वितीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर त्रिदिवसीय विश्व शांति श्री सिद्धि महायज्ञ जनकल्याण, धन, ऐश्वर्य, सुख, समृद्धि की प्राप्ति हेतु भव्य महायज्ञ का आयोजन अगहन माह के अंतिम गुरुवार दिनांक 3,4 एवं 5 दिसंबर 2025 को किया जा रहा है ज्योतिषाचार्य मां महालक्ष्मी सेवक आचार्य पंडित रवि भूषण शास्त्री ने समस्त श्रद्धालु जनों को वार्षिकोत्सव एवं महायज्ञ में पूण्य के भागी बनने के लिये अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने अपील किया है। 

गजमार पहाड़ी के पीछे ग्राम पंडरीपानी में हरियाली से आच्छादित महालक्ष्मी मंदिर जहाँ स्वयं माँ लक्ष्मी विराजी हुई हैं मंदिर में प्रवेश करते ही अलग अनुभूति होती है वही माता के ज्यो ही दर्शन होते है तो हमारे दोनों हाथ स्वमेव माता की ओर आश्रित एवं भावपूर्ण आगे हो जाते हैं लगता है आज हमारे समस्त दु:ख कष्ट माँ लक्ष्मी हर लेगी। पंडरीपानी स्थित महालक्ष्मी मंदिर की नींव 2017 में रख निर्माण कार्य आरंभ किया गया जो 2023 में पूर्ण हुआ और माता कृपा से प्राणप्रतिष्ठा 6 दिसंबर से 10 दिसंबर के शुभ मुहूर्त में किया गया। शास्त्री जी ने बताया कि मंदिर में 10 महाविद्या-तारा, काली, छिन्नमस्ता, षोडसी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगुलामुखी, माँ मातंगी, माँ कमला हैं,वही माँ कमला माँ विमला माँ मंगला और भैरव बाबा भी विराजे है।

वैष्णवदेवी धाम से 3 पिंडी महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती लाकर स्थापित किया गया है, वही 12 गजदेवता है सीढ़ी के द्वार में बैठे हैं माता के द्वारपाल -जय विजय हैं तो द्वार में गजलक्ष्मी बैठी हैं मंदिर में 11 छोटा गुम्बज और बड़ा नीलचक्र स्थापित है,शास्त्री जी ने बताया कि मंदिर प्रांगण में प्राचीन प्राकृतिक कुआं है, जिसे सप्ततीर्थ कूप कहते है जिसमे  जजमान को स्नान कराने से ग्रह दोष की शांति होती है। मंदिर के नीचे भवन का नाम शास्त्री जी ने अपनी माँ स्व. श्रीमती प्रियंबदा मिश्रा के नाम प्रियंबदा भवन रखा है।

 


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