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केंद्रीय मंत्री ने कलकत्ता पोर्ट की सुनाई सक्सेस स्टोरी, पोर्ट बिल पर सवालों का दिया जवाब
10-Feb-2021 1:17 PM
केंद्रीय मंत्री ने कलकत्ता पोर्ट की सुनाई सक्सेस स्टोरी, पोर्ट बिल पर सवालों का दिया जवाब

नई दिल्ली, 10 फरवरी | देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों को स्वायत्ता प्रदान कर उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए लाए गए द मेजर पोर्ट अथॉरिटी बिल (महापत्तन प्राधिकरण विधेयक) पर बुधवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान उठे सभी सवालों का केंद्रीय पोत परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनसुख मांडविया ने जवाब दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर सेक्टर में सुधार होने चाहिए और इसे निजीकरण से नहीं जोड़ना चाहिए। इस बिल से देश के प्रमुख बंदरगाहों की हालत सुधरेगी। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कलकत्ता पोर्ट की सक्सेस स्टोरी भी बताई। केंद्रीय राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सवाल उठाते हुए कहा कि केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकारों ने क्या अपने पोर्ट को विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र को नहीं दिया? सिर्फ मोदी सरकार अगर कुछ सुधार कर रही है तो फिर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 1995 से देश में पीपीपी मोड का इंपलीमेंटेशन शुरू हुआ, तब हमारी सरकार नहीं थी। सार्वजनिक सेक्टर में पीपीई आपरेटर आए। लेकिन, क्या पोर्ट को अपने निर्णय स्वयं लेने के लिए अधिकार देना चाहिए। पीपीई आपरेटर पोर्ट के बीच विवाद सुलझाने के लिए कोई सिस्टम भी होना चाहिए।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने पीपीई मॉडल से कलकत्ता पोर्ट के घाटे से मुनाफे में पहुंचने का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, जब नितिन गडकरी हमारे सीनियर मंत्री थे, तब कलकत्ता के लेबर यूनियन के लोग आकर मिले और बोले कि पोर्ट बंद होने की आशंका है, पेंशन मिलनी मुश्किल है। पोर्ट को बचा लीजिए। तब पीपीपी मॉडल से हमने उसे फिर से विकसित करने की शुरूआत की।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि आज कलकत्ता एयरपोर्ट के सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स की लायबिलिटी हमने खत्म कर दी है। जो कलकत्ता पोर्ट घाटा में चल रहा था, वह मुनाफे में पहुंच गया। यह पीपीपी मॉडल के कारण हुआ। मनसुख मांडविया ने कहा कि जब डेवलपमेंट की बात आए तो प्राइवेटाजेशन पर हल्ला नहीं मचाना चाहिए। हमने स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए लेबर यूनियन के साथ भी कंसल्टेशन किया है। बिल से जुड़ीं सभी औपचारिकताओं को पूरा किया है। (आईएएनएस)
 


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