नारायणपुर

संघर्ष से स्वास्थ्य तक: अबूझमाड़ के पूर्व नक्सल गढ़ों में बच्चों के दिलों तक पहुंची जीवन की धडक़न
07-Apr-2026 11:46 PM
संघर्ष से स्वास्थ्य तक: अबूझमाड़ के पूर्व नक्सल गढ़ों में बच्चों के दिलों तक पहुंची जीवन की धडक़न

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नारायणपुर, 7 अप्रैल। कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में आज एक नई कहानी लिखी जा रही है। नक्सल-मुक्ति के बाद प्रशासनिक पहुंच सुदृढ़ होने के साथ ही अब स्वास्थ्य सेवाएं उन अंतिम छोरों तक पहुंच रही हैं, जहां कभी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित  ‘प्रोजेक्ट धडक़न ’ इसी बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है। यह अभियान अब उन दुर्गम और पूर्व में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, जहां के बच्चे वर्षों तक स्वास्थ्य जांच और जागरूकता से दूर रहे।

 कलेक्टर नम्रता जैन के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से यह सुनिश्चित किया गया है कि अबूझमाड़ के सुदूर गांवों, आश्रम शालाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत बच्चों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम सीधे पहुंच सके। विशेष उपकरणों एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बच्चों के हृदय की गहन जांच की जा रही है, जिससे जन्मजात हृदय रोगों की समय रहते पहचान संभव हो पा रही है।

इस विशेष अभियान के अंतर्गत अब तक जिले के नारायणपुर एवं ओरछा विकासखंडों में कुल 2780 बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जांच के दौरान 4 बच्चों में हृदय रोग के लक्षण चिन्हित किए गए, जिनमें से 3 बच्चों को नवा रायपुर स्थित सत्य साईं अस्पताल में नि:शुल्क उपचार हेतु भेजा गया है, जबकि एक अन्य बच्चे को शीघ्र ही उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर किया जाएगा।

वन मंत्री  केदार कश्यप ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि जिन क्षेत्रों में कभी भय और असुरक्षा का वातावरण था, वहां आज स्वास्थ्य, शिक्षा और विश्वास का माहौल निर्मित हो रहा है।

कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि यह अभियान केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की उस सोच का परिणाम है, जो प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध है। अबूझमाड़ के जिन इलाकों में पहले स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियमित जांच, उपचार और जागरूकता सुनिश्चित की जा रही है।

जिला प्रशासन द्वारा अभिभावकों से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान कर बच्चों को जीवनदायी उपचार उपलब्ध कराया जा सके।


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