नारायणपुर

भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव पर निकाली शोभायात्रा
21-Apr-2026 11:27 PM
भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव पर निकाली शोभायात्रा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नारायणपुर, 21 अप्रैल। सर्व ब्राह्मण समाज नारायणपुर द्वारा भगवान परशुराम के प्राकट्योत्सव के अवसर पर विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और सहभागिता के साथ बढ़-चढक़र हिस्सा लिया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत  18 अप्रैल की प्रात: सामाजिक भवन में विधिवत अखण्ड रामायण पाठ से हुई। पूरे दिन श्रद्धालुजन भक्ति में लीन रहे और रामायण के पावन पाठ से वातावरण दिव्यता से ओत-प्रोत हो गया। पाठ की पूर्णाहुति के पश्चात भगवान परशुराम जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में समाजजन सम्मिलित हुए।

यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—जय स्तंभ चौक, गायत्री मंदिर, चांदनी चौक, सोनपुर रोड एवं मेन रोड से होकर पुन: सामाजिक भवन में संपन्न हुई। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा जयकारों, भजनों और धार्मिक नारों से पूरा नगर गूंज उठा, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।

इसके उपरांत वैदिक विधि-विधान से हवन-पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के वरिष्ठजनों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर विश्व कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक स्नेह भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और सामाजिक समरसता का परिचय दिया।

उल्लेखनीय है कि सर्व ब्राह्मण समाज नारायणपुर द्वारा विगत कई दशकों से इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का निरंतर संचालन किया जाता रहा है, जिनका उद्देश्य समाज में एकता, आध्यात्मिकता एवं लोककल्याण की भावना को सुदृढ़ करना है।

इस अवसर पर सर्व ब्राह्मण समाज नारायणपुर के अध्यक्ष आलोक कुमार झा ने कहा—भगवान परशुराम जी का प्राकट्योत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, परंपरा और आत्मिक एकता का जीवंत प्रतीक है।

इस प्रकार के आयोजन समाज को जोडऩे, संस्कारों को सुदृढ़ करने तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम हैं। हम सभी का दायित्व है कि इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाते हुए समाज और राष्ट्र के कल्याण हेतु समर्पित रहें।

समाज के इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया।


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