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बलौदाबाजार से उन्नाव, दिल्ली और मुजफ्फरपुर के रास्ते अमरीका तक..
सुनील कुमार ने लिखा है
08-Feb-2026 1:48 PM
बलौदाबाजार से उन्नाव, दिल्ली और मुजफ्फरपुर के रास्ते अमरीका तक..

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार की यह खबर है कि बिस्तर पर पड़ी 64 बरस की एक बीमार महिला के साथ उसके मकान मालिक ने अपने साथी सहित गैंगरेप किया। अब इस बात का भला अनिल अंबानी से क्या लेना-देना हो सकता है? लेना-देना यही है कि सेक्स अधिकतर लोगों के दिमाग पर पूरी तरह हावी रहता है, कई लोग उस पर काबू कर लेते हैं, और बहुत से लोग काबू नहीं कर पाते। अमरीका में अभी बच्चियों से बलात्कार करवाकर भड़वागिरी का एक दलाली-रैकेट चलाने वाले के दस्तावेज अमरीकी कानून मंत्रालय ने संसद के आदेश पर जारी किए हैं, जो बताते हैं कि किस तरह दुनिया का यह सबसे बड़ा दलाल बच्चियों से बलात्कार करवाकर दुनिया के कई देशों में अपना रैकेट चलाता था। उसी रैकेट में अनिल अंबानी का भी नाम आया है कि उसे मजा करने के लिए स्वीडन की एक लडक़ी दिलाने का प्रस्ताव रखकर इस दलाल ने अमरीका बुलवाया था, और अनिल अंबानी ने यह न्यौता मंजूर करने के लिए कुल 20 सेकेंड लगाए थे। यह भी सामने आया है कि दुनिया की कई सरकारों के मंत्रियों ने दूसरे देशों की सरकारों या कारोबारों से काम निकलवाने के लिए किस तरह इस भड़वे का इस्तेमाल किया, और दुनियाभर के बड़े-बड़े सरकारी और राजसी ओहदों पर रहने वाले लोग इसके टापू पर जाकर नाबालिग लड़कियों और छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार करते थे। जो इसके न्यौते पर इसके राजसी महलों में जाकर बच्चियों से बलात्कार करते थे, वे बलौदाबाजार के इस मकान मालिक से बहुत अलग तो नहीं हैं जो कि 64 बरस की बीमार और बुजुर्ग किराएदार से गैंगरेप कर रहा है। कुल मिलाकर बात यही है कि हर इंसान के भीतर इसी किस्म की हिंसानियत भरी हुई है। कुछ लोग उस पर काबू कर पाते हैं, बाकी लोग पहला मौका मिलते ही उसका इस्तेमाल करते हैं।

आज सुबह जो खबरें आई हैं, वे इतनी भयानक है कि उनकी चर्चा करते हुए भी डर लगता है। अमरीका के इस भड़वे-दलाल एपस्टीन की ई-मेल के ताजा जारी हुए जखीरे से पता लगता है कि किस तरह उसके एक साम्राज्य में बलात्कार की शिकार कम उम्र लड़कियां गर्भवती हो जाने पर जब बच्चों को जन्म देती थीं, तो उन बच्चों को पैदा होते ही उन लड़कियों से छीनकर हमेशा के लिए दूर ले जाया जाता था। इन ताजा ई-मेल से यह भी पता लगता है कि सेक्स-गुलामों की तरह इस्तेमाल की गई इन लड़कियों को इस दलाल के अहाते में ही दफन भी कर दिया गया, और इन बलात्कारियों में बड़े-बड़े लोकतंत्रों के शाही परिवार से लेकर राष्ट्रपति और मंत्री तक शामिल रहे। आज हालत यह है कि ब्रिटेन के एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ गया है क्योंकि वहां बच्चियों के बलात्कार रैकेट चलाने वाले इस भड़वे से यारी बनाए चलते रहा, उसका भांडाफोड़ हो जाने के बरसों बाद तक। दुनिया की कई सरकारों के लोगों ने इस भड़वे की सेवाओं का इस्तेमाल किया है, और उनके नाम एक-एक कर उजागर हो रहे हैं।

भारत का एक सबसे बड़ा उद्योगपति अनिल अंबानी अपने कामयाबी के दिनों में इस काम के लिए ऐसे दलाल के रास्ते किन लोगों से मिल रहा था, किसलिए मिल रहा था, यह सब सामने आना अभी बाकी है। लेकिन यह समझ पड़ता है कि नाबालिग बच्चियों की देह के लिए दुनिया की सरकारों के सबसे बड़े मुखिया भी किस तरह लार टपकाते बलात्कार करने को ऊतारू रहते हैं, वह फोटो, वीडियो, और ई-मेल से इस मामले में साबित हो रहा है। आज नौबत यह है कि इस भड़वे से यारी रखने वाले ब्रिटिश सांसद को यह बात उजागर हो जाने के बाद भी अमरीका में राजदूत बनाने वाले ब्रिटिश प्रधानमंत्री के इस्तीफा देने की नौबत आ गई है। संसद के भीतर, और संसद के बाहर वह गिड़गिड़ाकर माफी मांग रहा है, और बार-बार शर्मिंदगी जाहिर कर रहा है। और इस ब्रिटिश लॉर्ड से उसकी यह उपाधि छीनी जा रही है।

अगर कोई शर्मिंदगी जाहिर नहीं कर रहा है, तो वह दुनिया में एक सबसे नीच और कमीना इंसान डोनल्ड ट्रंप है, जो ऐसे विवादों के बीच भी आज अमरीकी राष्ट्रपति भवन के सोशल मीडिया अकाउंट पर बराक ओबामा और उनकी पत्नी को बंदर दिखाने वाले नस्लवादी वीडियो पोस्ट करने में लगा है। एपस्टीन से ट्रंप की यारी की ढेरों तस्वीरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन ट्रंप को कोई शर्म नहीं है। मुझे कम से कम इस बात को लेकर तसल्ली है कि मैंने ट्रंप के चुनाव अभियान के वक्त से इस आदमी की बातों और हरकतों की वजह से इसे नीच और कमीना लिखना शुरू कर दिया था। आज ओबामा के बारे में नस्लवादी वीडियो पोस्ट करने पर खुद ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने यह कहा है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में अमरीकी राष्ट्रपति भवन से इससे अधिक नस्लवादी कोई चीज निकलते देखी नहीं थी।

लेकिन महज अमरीका को क्यों कोसा जाए। भारत को देखें तो पिछले कुछ सालों में एक बात बिल्कुल साफ दिखती है कि बलात्कार जैसे हिंसक मामलों में भी रसूख पहले चलता है और कानून काफी दूरी तक उसके पांव सहलाते दिखता है। यूपी के उन्नाव के भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर को देखें तो उस पर बलात्कार का आरोप लगा था, महीनों तक एफआईआर भी नहीं हुई थी, और मुख्यमंत्री आवास के बाहर रेप-पीडि़ता को आत्मदाह की कोशिश करनी पड़ी थी, और बाद में जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तब जाकर कार्रवाई हुई थी। इसके बाद भी निचली अदालत दी गई सजा को हाईकोर्ट ने निलंबित करके जमानत दे दी थी, हमने जमकर उसके खिलाफ लिखा था और कुछ दिनों में ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले की आलोचना करते हुए उसे खारिज किया था। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के पहले तक सत्तारूढ़ विधायक होने का फायदा तो मिलते ही रहा। इंसाफ के लिए कितनी बलात्कार-पीडि़ता खुदकुशी करती रहेंगी?

कुछ ऐसा ही मामला बृजभूषण शरण सिंह का था जिसके खिलाफ कई महिला पहलवानों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, और सुप्रीम कोर्ट की दखल के बिना पॉक्सो का मुकदमा तक दर्ज नहीं हुआ था। सत्तारूढ़ पार्टी का सांसद होने का फायदा तो दिल्ली पुलिस से मिल ही रहा था। लोगों को तीसरा मामला भी भूला नहीं होगा जब गुजरात की बिलकिस बानो के 11 सामूहिक बलात्कारियों और उसके बच्चे के कातिलों को अच्छे आचरण के नाम पर पूरी सजा के पहले ही जेल से रिहा कर दिया गया, उनका सार्वजनिक अभिनंदन हुआ, और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस सरकारी फैसले को असंवैधानिक बताते हुए खारिज किया, और इन मुजरिमों को दुबारा जेल भेजा।

मुझे बिहार के मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों के थोक में बलात्कार और उनकी देह को बेचने के मामले भुलाए नहीं भूलते हैं। सत्ता ने बृजेश ठाकुर और दूसरे आरोपियों को बचाने की लंबे वक्त तक कोशिश की, लेकिन बाद में नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण बलात्कार के आरोप में इन्हें पॉक्सो अदालत से उम्रकैद हुई। हालत यह है कि सुप्रीम कोर्ट को सत्ता की मेहरबानी वाले बृजेश ठाकुर को एक दूसरे राज्य पंजाब की उच्च सुरक्षा जेल में भेजने का आदेश देना पड़ा, यह कहते हुए कि बृजेश ठाकुर बेहद ताकतवर व्यक्ति है, जिसे बिहार की जेल में रखना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और सीबीआई से कई सवाल भी पूछे कि इस मामले में शामिल कई ताकतवर लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? अदालत ने पूछा कि बिहार की भूतपूर्व मंत्री मंजू वर्मा को इस मामले में क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया?

आज के भारत से अधिक परिपक्व और गंभीर लोकतंत्रों में भी हाल यही है कि सत्ता की ताकत बलात्कारियों की ढाल बन जाती है जिसे कानून भी नहीं भेद पाता। दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों के मासूम बच्चियों से सामूहिक बलात्कार के इन मामलों के मुजरिम दुनिया में कई जगह आज भी सत्ता पर कायम हैं। यह नौबत बताती है कि ताकत हर किस्म के जुर्म से बचा सकती है, हर किस्म का जुर्म करने का हक दिला सकती है, और जुर्म के शिकार लोग अगर कमजोर हैं, तो लोकतंत्र उन्हें शायद ही कभी कुछ दिला सकता है।

यह पूरी नौबत यह भी बताती है कि सत्ता की ताकत जितनी बेकाबू रहती है, वह उतनी ही हिंसक और मुजरिम भी होते चलती है। निर्बाध ताकत तानाशाह बन ही जाती है, और दुनिया के बड़े-बड़े, और अपने-आपको महान कहने वाले लोकतंत्र भी मुजरिमों को मुखिया की तरह पा जाते हैं। यह लोकतंत्र के अंत का आरंभ नहीं है, यह सभ्यता के अंत का आरंभ है। मैं यह बात पहले भी कुछ मौकों पर कैमरों पर बोल चुका हूं, और अपने अखबार में लिख चुका हूं, आज पूरी दुनिया में सत्तारूढ़-हिंसानियत का नंगा नाच देखकर भारी मन से उसी बात को दुहरा भर रहा हूं। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार की जिस घटना से मैंने बात शुरू की थी, वह भी ताकत की हिंसा का एक सुबूत है, 64 बरस की बूढ़ी-बीमार, बिस्तर पर पड़ी किराएदार के मुकाबले मकान मालिक और उसके दोस्तों की गैंगरेप करने की ताकत का। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)


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