महासमुन्द
महासमुंद,17जून। आरटीआई कार्यकर्ता विनोद दास ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि जिले में सुशासन के दावों और हकीकत के बीच का फर्क एक बार फिर उजागर होता दिखाई दिख रहा है। कलेक्टर कार्यालय महासमुन्द से एक शिकायत मामले में 15 दिवस के भीतर जांच कर रिपोर्ट देने का स्पष्ट निर्देश जारी हुआ है लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी एक मामले की शिकायत आवेदन में डेढ वर्ष से जांच शुरू तक नहीं की है। बल्कि शिकायत आवेदन को दबा कर बैंठे हुए हंै। श्री दास के मुताबिक 26 दिसम्बर 2024 को विनय लंगेह कलेक्टर महासमुन्द को शिकायत की है जिसमें आरोप लगाया है कि बीईओ कार्यालय सरायपाली में नियम विपरीत फर्जी तरीके से यात्रा देयक तैयार करके शासन को क्षति पहुंचाया है। जिसकी जांच की जाए। जिसमें अपर कलेक्टर ने 15 जनवरी 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द को 15 दिवस में जांच पूर्ण करने का आदेश दिया था। हैरत की बात है कि यह शिकायत पर पिछले डेढ साल से जांच लंबित है। उन्होंने इस मामले को एक सवाल उठाया है कि तात्कालीन बीईओ सरायपाली अब डीईओ महासमुन्द कार्यालय में सहायक संचालक के रूप में पदस्थ हैं। ऐसे में इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद कैसे की जाए? कथित वित्तीय अनियमितता की जांच कब पूरी होगी? दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी? ।
बीएल देवागंन जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द का इस मामले में कहना है कि मुझे इस शिकायत के संबंध में मालूम नहीं है। आपने बताया तो अभी पता चला है। शिकायत शाखा से फाइल मंगवाकर देखता हूं।


