महासमुन्द
लगातार ठिकाने, मोबाइल तथा सिम कार्ड बदल कर थे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 29 मई। करोड़ों के एलपीजी गैस गबन कांड में फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को महासमुंद पुलिसे ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार थे और लगातार अपने ठिकाने, मोबाइल तथा सिम कार्ड बदलकर पुलिस को चकमा दे रहे थे। पुलिस ने तकनीकी जांच, टॉवर डंप, सीडीआर, टोल प्लाजा डाटा, सोशल मीडिया विश्लेषण और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद दोनों तक पहुंच बनाई।
पुलिस के अनुसार इस पूरे गबन कांड का मुख्य षड्यंत्र खाद्य विभाग के भीतर ही रचा गया था। जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पर्दे के पीछे का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है, जबकि पंकज चंद्राकर कथित तौर पर डील मेकर की भूमिका में सामने आया। वहीं मनीष चौधरी ने मध्यस्थता करते हुए विभिन्न एजेंसियों से बातचीत की।
पुलिस के मुताबिक शुरुआत में गबन प्रकरण को दबाने के लिए एक करोड़ 30 लाख रुपए की मांग की गई थी, जो बाद में सौदेबाजी के बाद 90 लाख रुपए में तय हुई। पुलिस विवेचना में खुलासा हुआ है कि 30 मार्च 2026 को छह एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित रखने के नाम पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सुपुर्द किया गया था। लेकिन इसके 11 दिन पहले यानी 19 मार्च से ही गैस हेराफेरी की साजिश शुरू हो चुकी थी।
आरोप है कि ट्रकों का तत्काल वजन नहीं कराया गया और सभी कैप्सूल जल्द खाली करवाने में संबंधित लोगों की मिलीभगत रही। सभी टैंकर खाली होने के बाद 6 से 8 अप्रैल के बीच उनका वजन कराया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी तौल पंचनामा तैयार कर मुख्य षड्यंत्रकारियों को ही उसका गवाह बनाया गया। खाद्य विभाग कार्यालय स्थित तौल कांटे पर कथित कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए, जिनमें हस्ताक्षर भी कराए गए।
पुलिस के मुताबिक आपदा और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का फायदा उठाकर गबन की गई एलपीजी गैस को करीब 20 एजेंसियों और संस्थानों को बिना जीएसटी, कच्चे बिलों पर मनमाने दाम में बेचा गया। जांच में सामने आया कि अप्रैल माह में जबकि बिक्री 135 टन दिखाई गई। इससे कालाबाजारी की पुष्टि होने लगी है।
इस मामले का मूल प्रकरण थाना सिंघोड़ा में दर्ज अपराध से जुड़ा है। जिसमें दिसंबर 2025 में छह एलपीजी कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। भीषण गर्मी और सुरक्षा जोखिम को देखते हुए इन्हें सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक अनुमति के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सुपुर्द किया गया था। बाद में जांच में पाया गया कि पांच ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस, जिसकी कीमत लगभग 77 लाख रुपए थी, का आपराधिक न्यास भंग कर गबन किया गया। प्रकरण में अब तक खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं और आने वाले दिनों में इसका खुलासा किया जाएगा।


