महासमुन्द

शायर बशीर बद्र की महासमुंद से जुड़ी यादें...
29-May-2026 3:31 PM
शायर बशीर बद्र की महासमुंद से जुड़ी यादें...

गज़़लों और यादगार अशआर में बशीर बद्र साहब हर मोड़ पर मिलेंगे, हमेशा जिन्दा: अशोक शर्मा

मुसाफिर हैं हम भी, मुसाफिर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी...पर गीत-शेर-गजल की दुनिया में

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 29 मई। महासमुंद से डॉ. बशीर बद्र की बहुत सी यादें जुड़ी हुई है। साहित्यकार एवं कवि अशोक शर्मा ने छत्तीसगढ़ अखबार को जानकारी दी है कि एक कार्यक्रम के सिलसिले में बशीर बद्र रायपुर आए हुए थे और रायपुर में शायर शौक जालंधरी के मेहमान थे। साहित्यकार अशोक शर्मा प्रसिद्ध व्यंग्यकार लतीफ़  घोंघी के साथ आकाशवाणी की एक रिकार्डिंग में पहुंचे हुए थे। इसी दौरान उन्हें बशीर बद्र के रायपुर में होने की खबर मिली तो दोनों ने तय किया कि किसी भी हालत में उन्हें महासमुंद लेकर चलना है। लेकिन शौक जालंधरी साहब ने बहुत सी अड़चनें लगाईं लेकिन फिर भी वे बशीर बद्र साहब से मिलने और उन्हें महासमुंद लाने में कामयाब रहे।

दूसरे दिन जनपद पंचायत महासमुंद के सभागार में आयोजित एक  गोष्ठी में बशीर साहब ने अपनी बहुत सी रचनाएं सुनाई। उनके साथ शौक जालंधरी और शाद भंडारवी भी आए थे। महासमुंद का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके सामने शरद श्रीवास्तव अशोक शर्मा ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। महासमुंद के आत्मीय वातावरण से वे बहुत प्रभावित हुए और अशोक शर्मा की रचना ’कल शहर जब बंद था तो बाप से परिचय हुआ,वर्ना सोए में गया और जागते लौटा नहीं’ पर उन्होंने खुलकर सराहना की थी। इसके 34साल बाद जब 2021-22 जब अशोक शर्मा का पहला स्वतंत्र गज़़ल संग्रह प्रकाशित हुआ तो उनकी सराहना के कारण ही अपने संग्रह का शीर्षक ’बाप से परिचय हुआ’ रखा। इसका जिक्र संग्रह की भूमिका में भी है।

अशोक शर्मा बताते हैं कि दूसरे सत्र में एक संगीत गोष्ठी गज़़ल गायिका साधना रहाटगांवकर के निवास में हुई जिसमें उन्होंने बशीर बद्र साहब की ही रचनाओं को स्वरबद्ध किया हुआ था। अपनी रचनाओं की सांगितिक प्रस्तुति सुनते हुए बशीर बद्र साहब भावुक होकर रो पड़े थे। विदा होते हुए उन्होंने वादा किया कि अब वे जब भी छत्तीसगढ़ आयेंगे तो महासमुंद ज़रूर आयेंगे।

श्री शर्मा के अनुसार उन दिनों बशीर बद्र मेरठ में अपने घर जला दिए जाने की घटना से काफी विचलित थे तथा कुछ समय पहले ही भोपाल शिफ्ट हुए थे। महासमुंद में लतीफ़  घोंघी, ईश्वर शर्मा, साधना रहाटगांवकर, हुकुम शर्मा, मनोहर शर्मा, व्ही जी रहाटगांवकर, एनबी लोणारे, देवी चंद श्रीश्रीमाल, शरद श्रीवास्तव जैसे साहित्य, संगीत और पत्रकारिता के बड़े-बड़े लोगों को महासमुंद कला संगम के बैनर तले अनेक उत्कृष्ट आयोजन की जानकारी और घरेलू माहौल में लगातार कार्यक्रम की सूचना ने उन्हें चकित भी किया और भावुक भी।

अशोक शर्मा के अनुसार दो-तीन साल बाद उनकी मुलाकात बशीर बद्र से भोपाल में उनके निवास में भी हुई। महासमुंद से अपने रिश्तों को उन्होंने याद रखा हुआ था। बशीरबद्र ने श्री शर्मा का पूरा सम्मान देते हुए खुद ही शरबत बनाकर पिलाई और अपना एक संग्रह उपहार स्वरूप दिया। साथ ही मिडिल ईस्ट में आहुत एक मुशायरे के दौरान मिली हुई एक शाल भी लाकर दिखाई जिसमें सोने के तारों से उनका ही एक शेर बहुत सफाई से काढ़ा गया था।

दो-तीन साल बाद एक बार फिर वे डॉ. रमेश के बुलावे पर कवि नीरज जी के साथ महासमुंद आए। इस समय भी उन्होंने महासमुंद से जुड़ी अपनी यादों को सब के साथ साझा किया। कुछ वर्षों बाद वे स्मृति लोप के शिकार हो गए और महासमुंद नहीं आ सके।

अशोक शर्मा कहते हैं-बशीर बद्र साहब अपनी शानदार गज़़लों, यादगार अशआर और अनूठी प्रस्तुति के कारण  हमारी यादों में हमेशा बने रहेंगे। उनका ही एक शेर है-मुसाफिर हैं हम भी, मुसाफिर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी। अपनी गज़़लों और यादगार अशआर में बशीर बद्र साहब हमेशा जिन्दा रहेंगे और निश्चित ही हर मोड़ पर और बार-बार उनकी रचनाओं

के कारण उनसे मुलाकात होती रहेगी। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि।


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