महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 28 मई। कोमाखान तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पतेरापाली के आश्रित ग्राम लोंदामुड़ा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़े को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गांव के करीब 15 से 20 गरीब परिवारों ने एकजुट होकर पूर्व सरपंच नारायण नायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व सरपंच ने अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल कर 3.30 एकड़ घास सरकारी भूमि को अवैध तरीके से अपने और अपनी पत्नी के नाम पर पट्टे में बदलवा लिया।
इस मामले को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन और सुशासन तिहार में आवेदन सौंपकर पट्टे को तुरंत निरस्त करने और जमीन को दोबारा घास भूमि घोषित करने की मांग की है।
ग्रामीण खेमलाल निषाद, जगमोहन निषाद, आसाराम निषाद, कमलाबाई और समयलाल देवांगन का कहना है कि वे इस जमीन पर अपने पुरखों के समय से खेती-बाड़ी करते आ रहे हैं। उनके पास इसके पुराने राजस्व रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। जिनमें यह ज़मीन घास भूमि के रूप में दर्ज थी। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 15 वर्ष पूर्व नारायण नायक ने हेरफेर कर इसे अपने नाम करवा लिया।
गांव की कमला देवांगन ने कहा कि पुरखों के समय की घास जमीन पर नारायण नायक ने गलत तरीके से पट्टा बना लिया है। शासन इसे रद्द कर फिर से घास जमीन घोषित करे ताकि हम खेती कर सकें। रुखमणी यादव व खेम सिंह निषाद ने बताया कि हमारा घर-द्वार प्रभावित हो रहा है। हमने अधिकारियों से गुहार लगाई है।
उस गंभीर आरोपों पर पूर्व सरपंच नारायण नायक ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे छवि धूमिल करने की साजिश बताया है।
कहा कि यह जमीन मैंने लगभग 25 वर्ष पहले कानूनी तौर पर विधिवत खरीदी थी। जिसके सारे पक्के दस्तावेज और प्रमाण आज भी मेरे पास सुरक्षित हैं। मैं खुद चाहता हूं कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


