महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,18अप्रैल। महासमुंद विकासखंड शिक्षा अधिकारी लीलाधर सिन्हा के विरुद्ध शिक्षकों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताडि़त करने के आरोपों के बाद कलेक्टर कार्यालय ने एक बार फिर तीन सदस्यीय नई जांच समिति गठित की है। मालूम हो कि सर्व शिक्षक संघ ने इस नई कमेटी को प्रशासन की बचाओ रणनीति करार देते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
वर्तमान में गठित नई समिति अरुण प्रधान, चमनलाल चन्द्राकर और एच एल यादव को एक सप्ताह के भीतर प्रतिवेदन सौंपने का आदेश दिया गया है। सर्व शिक्षक संघ ने साफ कर दिया है कि वे जिला प्रशासन की निष्पक्षता पर नजर रखे हुए हैं। यदि समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होती है, तो शिक्षक सडक़ों पर उतरने को मजबूर होंगे। गौरतलब है कि इससे पहले जिला कोषालय अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई गई थी। जिसे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी। विडंबना यह है कि महीनों बीत जाने और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा तीन बार स्मरण पत्र जारी करने के बावजूद उस समिति ने जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है। जिले के शिक्षकों का आरोप है कि जब पुरानी समिति ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो अब नई कमेटी बनाना केवल मामले को लटकाने और दोषी बीईओ को संरक्षण देने का प्रयास है।
कलेक्टर द्वारा जारी ताजा आदेश में बीईओ सिन्हा के खिलाफ निम्नलिखित छह बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। जिसमें संतान पालन अवकाश में वसूली, अवकाश स्वीकृत करने के नाम पर शिक्षिकाओं से अवैध धन उगाही, कार्यालय व्यय की राशि का दुरुपयोग, फ र्जी बिलों, चपरासी के साथ मोटरसाइकिल पर दौरा कर लाखों फ र्जी टीए क्लेम, ऑनलाइन आवेदनों को रोककर चहेतों को ऑफ लाइन छुट्टियां देना, शालाओं के सेटअप और शिक्षकों के समायोजन में अनियमितता का आरोप है।
सर्व शिक्षक संघ के पदाधिकारी पर टेकराम सेन, ईश्वर चंद्राकर ने स्पष्ट एक किया है कि जब तक बीईओ को पद से नहीं हटाया जाता, निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी टालमटोल की गई तो वे आमरण अनशन और भूख हड़ताल करेंगे।


