महासमुन्द

खाद के लिए संघर्ष कर रहे किसान, मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन-अभिषेक
05-Jun-2026 3:50 PM
खाद के लिए संघर्ष कर रहे किसान, मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन-अभिषेक

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 5 जून। कांग्रेस भवन में कल दोपहर आयोजित पत्रकार वार्ता में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि खरीफ  सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले में खाद संकट गहराने लगा है। किसानों को डीएपी एवं अन्य उर्वरकों के लिए सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस स्थिति को लेकर किसान कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन पर किसानों की समस्याओं के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

पत्रकार वार्ता के बाद जिला किसान कांग्रेस की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसान वर्तमान में खाद के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। कई समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है, जहां खाद उपलब्ध है वहां भी किसानों को सीमित मात्रा में ही वितरण किया जा रहा है। इससे खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

बैठक में कहा गया कि खरीफ  फसलों की बोनी का समय नजदीक है और किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसान कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि जिले की सभी समितियों में पर्याप्त मात्रा में डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

नेताओं ने आरोप लगाया कि खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और कई स्थानों पर किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

बैठक में किसानों की विभिन्न समस्याओं पर भी चर्चा की गई तथा प्रशासन से खाद संकट दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।

इस अवसर पर पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर,पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ.रश्मि चंद्राकर, दाऊलाल चंद्राकर, मानिक राम साहू, अंकित बागबाहरा, खिलावन बघेल, राजेश जैन, किसान कांग्रेस के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। सभी ने कहा कि राजनीति से परे अब हमें धरातल पर उतरना होगा। क्योंकि केवल स्वागत-सत्कार से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। जब भाषण देना होता है तो बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, पर जब जमीनी स्तर पर किसान खाद, बीज और डीजल के लिए रोता है, तब पूरी प्रशासनिक व्यवस्था मौन हो जाती है। रसूखदार लोग अपनी पहचान के बल पर व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन आम और गरीब किसान पूरी बेबस हो चुका है।


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