महासमुन्द
ग्रामीणों ने जनदर्शन में की शिकायत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
पिथौरा, 6 जून। ग्राम पंचायत लाखगढ़ में मनरेगा, गौठान और गोधन न्याय योजना से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों और ग्राम युवा समिति के सदस्यों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जिला पंचायत द्वारा पुलिस में अपराध दर्ज कराने के लिए आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर की गई जांच में मनरेगा तथा गौठान संबंधी कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की गई थी। आवेदकों का दावा है कि जांच प्रतिवेदनों में फर्जी मस्टर रोल, गोबर खरीदी और वाउचर से संबंधित लेन-देन का उल्लेख किया गया है।
आवेदकों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में गौठान की विभिन्न सुविधाओं और संचालन की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। उनका कहना है कि इन निष्कर्षों के आधार पर जिला पंचायत महासमुंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 16 दिसंबर 2025 को जनपद पंचायत पिथौरा को संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध दर्ज कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया था।
ग्रामीणों और आवेदकों का आरोप है कि ग्राम पंचायत लाखगढ़ के तत्कालीन सरपंच प्रियरंजन कोसरिया, सचिव रामवतार ध्रुव और रोजगार सहायक कैलाश कोसरिया के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उनका यह भी आरोप है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
आवेदकों का कहना है कि इस मामले से संबंधित दस्तावेजों और जांच प्रतिवेदनों का विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया गया था तथा बाद में अपराध दर्ज करने के संबंध में आदेश जारी किया गया। उनका आरोप है कि आदेश के बावजूद कार्रवाई लंबित है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जनदर्शन और कलेक्टर जनदर्शन में की गई थी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। उनका आरोप है कि अब जनपद पंचायत स्तर पर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन और मुख्यमंत्री जनदर्शन में आवेदन देकर मामले की पुन: जांच तथा पूर्व में जारी आदेशों के अनुरूप कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे आमरण अनशन पर बैठ सकते हैं।


