महासमुन्द
100 बंदियों की जांच, 7 में मानसिक विकार के लक्षण
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,17अप्रैल। बंदियों में तनाव, अवसाद और नकारात्मकता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से कल गुरूवार को जिला जेल महासमुंद में एक मानसिक स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान 100 बंदियों की जांच की गई जिनमें से 7 में मानसिक विकार के गंभीर लक्षण मिले।
इस शिविर को न केवल बंदियों के उपचार के लिए बल्कि उनके सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक बड़ी मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस शिविर में चिकित्सा विशेषज्ञों ने बंदियों के मन की उलझनों को सुलझाने का प्रयास किया। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय महासमुंद के स्पर्श क्लिनिक मनोरोग विभाग की टीम ने बंदियों को तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक गुर सिखाए।
टीम का नेतृत्व कर रहीं मनोचिकित्सक डॉ.आशना ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बंदियों को प्रेरित करते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों ध्यान और सकारात्मक सोच के जरिए आप अपने भीतर एक नई दनिया का निर्माण कर सकते हैं।
जेल परिसर में आयोजित इस शिविर ने यह संदेश दिया है कि न्याय और सुधार की प्रक्रिया में मानवता और मानसिक स्वास्थ्य का स्थान सर्वोपरि है। बंदियों को मुफ्त दवाइयों के साथ-साथ मनोसामाजिक परामर्श प्रदान करना एक अनुकरणीय पहल है। इससे आने वाले समय में जेल के वातावरण में अधिक संवेदनशीलता और सकारात्मकता देखने को मिलेगी।
इस मौके पर नर्सिंग अधिकारी खोमन लाल साहू, मनोरोग समाज कार्य विशेषज्ञ राम गोपाल खूंटे और डा. अंकित सहित अन्य मौजूद थे। शिविर के दौरान जेल के 100 बंदियों का गहन परीक्षण किया गया। विशेषज्ञों ने पाया कि अधिकांश बंदी जेल की सख्त दिनचर्या, अपनों से दूरी और भविष्य की चिंता के कारण सामान्य तनाव महसूस कर रहे थे।


