महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 6 मार्च। जिले में लगतार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। गर्मी के तीखे को देखते हुए कलेक्टर किन्य कुमार लंगेह ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। सीएमएचओ डॉ.आई नागेश्वर राव ने हीट वेव से बचाव के लिए राज्य शासन की गाइडलाइन के अनुरूप विस्तृत स्वास्थ्य सलाह जारी की है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस 104 फैरेनाइट या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे हीट वेव या लू की स्थिति माना जाता है। डा. नागेश्वर राव ने बताया ने बताया कि हमारे मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस भाग शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण यह तंत्र काम करना बंद कर देता है। जिससे व्यक्ति हीट स्ट्रोक का शिकार हो जाता है। इसका सबसे अधिक खतरा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों को होता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि धूप से बचें, बहुत जरूरी न हो तो दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें। सिर ढंककर रखें। बाहर जाते समय सिर और कानों को कपड़े या गमछे से अच्छी तरह ढंकें। हमेशा हल्के रंग के, ढीले, सूती कपड़े ही पहनें। हाइडेटेड रहें, प्यास न लगने पर भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
डॉ. राव ने नागरिकों से अपील की है कि वे गमी के मौसम में अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करें। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर टोल.फ्री नंबर 104 आरोग्य सेवा केंद्र से मुफ्त सलाह लें। लू लग जाए तो अस्पताल ले जाने से पहले मरीज के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ जैसे कच्चे आम का पना, जलजीरा या ओआरएस घोल दें। मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं। शरीर के तापमान को कम करने के लिए ठंडे पानी का छिडक़ाव करें। लू लगने पर शरीर कई तरह के संकेत देता है, जिन्हें पहचानना बेहद जरुरी है। सिर में भारीपन और तेज दर्द हो, तेज बुखार के साथ मुंह बार-बार सूख रहा हो, चक्कर आ रहहा हो, उल्टी महसूस हो, भूख कम लगे और शरीर में कमजोरी महसूस हो तो समझें कि लू लगी है।


