महासमुन्द
19 बार के चुनावों में कांग्रेस को 11, बीजेपी को 4, अन्य को एक-एक बार जीत मिली
विद्याचरण शुक्ल महासमुंद से 7 बार जीते थे
उत्तरा विदानी
महासमुंद, 8 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। महासमुंद में भी लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। प्रशासनिक तौर पर भी तैयारियां कमोबेश पूरी कर ली गई हैं। राजनीतिक गलियारे में जोरदार उठापटक जारी है।
महामसुंद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में महासमुंद जिले के चारों विधानसभा खल्लारी, महासमुंद, बसना, सरायपाली के अलावा धमतरी, कुरुद, गरियाबंद, बिंद्रावनागढ़ और राजिम विधानसभा शामिल हैं। महासमुंद से निर्वाचित सांसदों में सन 1952 में कांग्रेस के शिवदास डागा, 1954 में मगनलाल बागड़ी सोशलिस्ट पार्टी, 1957 में कांग्रेस के विद्याचरण शुक्ल, 1962 में कांग्रेस के विद्याधरण शुक्ल, 1964 में विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस, 1967 विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस, 1971 में कांग्रेस के कृष्णा अग्रवाल, 1977 में जनता पार्टी से बृजलाल वर्मा, 1980 में कांग्रेस से विद्याचरण शुक्ल, 1984 में कांग्रेस से विद्याचरण शुक्ल, सन 1989 में जनता दल से विद्याचरण शुक्ल, 1991 में कांग्रेस से पवन दीवान, 1996 में पवन दीवान कांग्रेस, 1998 में भाजपा से चंद्रशेखर साहू, 1999 में कांग्रेस से श्यामाचरण शुक्ल, 2004 में कांग्रेस के अजीत जोगी, 2009 में चंंदूलाल साहू भाजपा, 2019 में भाजपा से चुन्नीलाल साहू ने जीत दर्ज की है।
इस तरह महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र में हुए कुल 19 बार के चुनावों में कांग्रेस ने 11 बार जीत दर्ज की है। बीजेपी को चार बार और अन्य को एक-एक बार जीत मिली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. विद्याचरण शुक्ल महासमुंद लोकसभा से 7 बार जीते थे। जिसमें से 6 बार कांग्रेस और एक चार जनता दल के प्रत्याशी थे। सन 1952 के प्रथम आम चुनाव में रायपुर के स्व.शिवदास डागा जीते थे। लेकिन उनके असामयिक निधन के कारण सन 1954 में हुए उपचुनाव में स्व.मगनलाल बागड़ी सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे।
सन् 1962 के तीसरे आम चुनाव में स्व. विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस से निर्वाचित हुए थे। लेकिन उनके प्रतिद्वंदी प्रत्याशी सोशलिस्ट पार्टी के स्व. डॉ.खूबचंद बघेल द्वारा चुनाव में अनियमितता की याचिका लाए जाने और चुनाव आयोग की जांच में शिकायत सही पाए जाने पर चुनाव परिणाम को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद सन 1977 में स्व.बृजलाल वर्मा सांसद निर्वाचित होकर और महासमुंद के विधायक स्व. पुरुषोत्तम कौशिक रायपुर से सांसद निवचित होकर केंद्र सरकार में मंत्री बने थे। स्व. पवन दीवान कांग्रेस प्रत्याशी और चंदूलाल साहू बीजेपी प्रत्याशी के रूप में 2-2 बार जीते और वे दोनों गरियाबंद जिले के राजिम से थे। चंद्रशेखर साहू बीजेपी, स्व. श्यामाचरण शुक्ल कांग्रेस, स्व.अजीत जोगी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में 1-1 बार जीते थे।
महासमुंद जिले के बागबाहरा निवासी स्व. कृष्णा अग्रवाल सन 1971 में और बागबाहरा विकासखंड के ही चुन्नीलाल साहू वर्तमान में बीजेपी सांसद हैं। इस प्रकार 19 चुनाव में सिर्फ 2 बार ही महासमुंद जिले को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। विशेष उल्लेखनीय यह है कि स्वतंत्र भारत में मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व.पं.रविशंकर शुक्ल इसी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सरायपाली विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। इसी तरह स्व. श्यामाचरण शुक्ल विंद्रानवागढ़ व राजिम से विधायक निर्वाचित होकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी महासमुंद लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हंै।
इस क्षेत्र से स्वतंत्रता आंदोलन में पं. सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, पं.नारायण नेधावले, नाथुजी जगताप जैसे ऊंचे कद वाले जननेता मिले हैं। बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में सन 1920 में कंडेल नहर आदोलन पंचायत प्रारंभ हुआ था। कहा जाता है कि इस आंदोलन की सफलता उपरांत महात्मा गांधी धमतरी आए थे। महात्मा गांधी के आगमन से स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सत्याग्रहियों में उत्साह का संचार हुआ था।
राष्ट्रीय आदोलन में महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान के रूप में सन 1930 के जंगल सत्याग्रह को गिना जाता है। यह आंदोलन वास्तव में धमतरी जिले के सिहावा नगरी क्षेत्र के जंगल से सन 1922 में जननेता श्यामलाल के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ था। सन 1930 में महासमुंद के तमोरा से पुन: प्रारंभ हो राजिम क्षेत्र के कनेकेरा, कोडिय़ा और धमतरी तक फैल गया था। तमोरा सत्याग्रह में कंवर बाला दयावती चर्चित हुई थी। सत्याग्रह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अनेक हथकंडे अपनाए थे। रूद्री में पुलिस फायरिंग में तरुण सत्याग्रही, सिंधु कुम्हार और सानू यादव घायल हुए थे। जिनकी कुछ दिनों बाद मृत्यु हो गई थी।
अविभाजित मध्यप्रदेश के अंतर्गत सरापपाली राज परिवार के वीरेंद्र बहादुर सिंह व उनकी पुत्री पुखराज सिंह, स्व. महेंद्र बहादुर सिंह बसना क्षेत्र से और डॉ.विमल चोपड़ा महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव जीते हैं।
महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सामाजिक संरचना पर नजर डालें तो पाएंगे कि अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 26.5 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 10.43 प्रतिशत है। शेष 63 प्रतिशत आबादी में ओबीसी लगभग 51 प्रतिशत और अनारक्षित वर्ग 12 प्रतिशत होना अनुमानित है। विभिन्न माध्यमों में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार साहू 18 प्रतिशत, गोंड़ 15 प्रतिशत, 8 प्रतिशत यादव हंै। सतनामी 6 प्रतिशत, कंवर 5 प्रतिशत, निषाद 5 प्रतिशत, मरार 5 प्रतिशत, गांड़ा 4 प्रतिशत, कोलता 2.5 प्रतिशत, अघरिया 2 प्रतिशत, कलार 2 प्रतिशत होना अनुमानित है, जो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं।


