महासमुन्द
लंबे समय से मांग कर रहे थे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 9जून। एनएच-53 से लगे ग्राम कौंवाझर के ग्रामीणों व पंचायत प्रतिनिधयों ने रविवार को जनभागीदारी से एनएच-53 से गांव तक पहुंचंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंंने वाली मुख्य मार्ग की मरम्मत कर चलने योग्य बनाया। यहां के ग्रामीण लगातार उक्त मार्ग के निर्माण की मांग जनप्रतिनिधियों से कर रहे थे। एनएच-53 से कौंवाझर तक पहुंचने का यह एकमात्र मार्ग है। गांव के मुहाने पर तालाब इसी मार्ग से लगा है।
ग्रामीण बताते हैं कि अत्यंत जर्जर होने के कारण इस मार्ग में चलना मुश्किल हो जाता है तथा बरसात में तो स्थिति और बदहाल हो जाती है। कुछ दिन पूर्व ही कलेक्टर द्वारा समस्त पंचायतों में मोर गांव-मोर पानी अभियान 2.0 के तहत जल संरक्षण के लिए लघु संरचना सोख्ता निर्माण जनभागीदारी से कराए जाने का निर्देश जारी हुआ था। कौंवाझर के ग्रामीणों ने कहा कि हमारी सडक़ निर्माण की मांग पूरी नहीं हो पाई, लेकिन कलेक्टर के आदेश के परिपालन में हम सभी ने मिलकर जल संरचना निर्माण कर आसपास पौधरोपण किए हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने ग्राम सभा में प्रस्ताव बनाकर जल संरचनाओं के निर्माण व सडक़ मरम्मत की रूपरेखा तैयार की। इसके तहत सभी ने मिलकर कल जनभागीदारी से ग्राम पहुंच मार्ग को व्यवस्थित किया है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से जिला पंचायत के पूर्व सभापति अमर अरूण चंद्राकर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि सडक़ हमारी मूलभूत जरूरत है। शासन-प्रशासन द्वारा मांगे अनसुना किया जा रहा है, इसलिए ग्रामीणों ने सामूहिक जनभागीदारी से सडक़ मरम्मत कर व्यवस्थित करने का काम कियाए जो सराहनीय पहल है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से रजनी नेताम, रेवती बाई, बिसाहिन, चम्पा, इंद्रा बाई, अहिल्या, भोजबाई, उत्तराबाई, रेखा, रजनी पारधी, बहुरा, मनटोरा, मुन्नी, आसो, सुकवारो, लता यादव, राजकुमारी, अनिता भगत, हेमबाई, भागवती, सोहागाबाई सहित बड़ी संख्या पंच गण, ग्रामीण जन, युवाओं का बड़ा योगदान रहा।


