महासमुन्द
5 क्ंिवटल बाहर निकाली जा चुकी है, अब भी बड़ी संख्या में मृत मछलियां मौजूद लाखों का नुकसान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 9 जून। महासमुंद जिले के सांकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नवागांव के आश्रित ग्राम केसरीपुर स्थित एक निजी मछली पालन तालाब में संदिग्ध परिस्थितियों में हजारों मछलियों की मौत हो गई है। इस घटना से मछली पालकों को लाखों रुपए की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है।
लाखों की क्षति होते देख मछली पालक की तबीयत बिगड़ गई है और रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज जारी है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। तालाब के पानी में किसी जहरीले पदार्थ के मिलाए जाने की आशंका ग्रामीणों ने जताई है। मामले की शिकायत सांकरा थाने में दर्ज कराई गई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार केसरीपुर में मोहन पटेल, चंद्रमणि पटेल और परमानंद पटेल द्वारा लगभग 12 से 13 एकड़ क्षेत्र में व्यवसायिक मछली पालन किया जा रहा था। सोमवार सुबह जब तालाब का निरीक्षण किया गया तो बड़ी संख्या में मछलियां मृत अवस्था में पानी की सतह पर तैरती हुई दिखाई दीं। बहुत सी मछलियां जिंदा थीं और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और देखते ही देखते वे मर रही थीं। मृत मछलियों में दो किलो तक वजन वाली बड़ी मछलियां भी शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण और मछुआरे मौके पर पहुंच गए। मछली पालकों का दावा है कि सुबह तक तालाब से करीब पांच क्विंटल मृत मछलियां बाहर निकाली जा चुकी थीं, जबकि तालाब में अब भी बड़ी संख्या में मृत एवं अर्धमृत मछलियां मौजूद हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कुल नुकसान लाखों रुपए तक पहुंच सकता है। घटना के बाद पूरे गांव में चिंता का माहौल है।
मछली पालकों और ग्रामीणों के मुताबिक तालाब के समीप एक संदिग्ध बोतल मिली है। इसके बाद आशंका है कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा तालाब में जहरीला रसायन या कीटनाशक डाला गया हो सकता है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके। सांकरा थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि तालाब के पानी और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से पानी की वैज्ञानिक जांच, मृत मछलियों का परीक्षण, दोषियों की पहचान और प्रभावित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल मछलियों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि इससे परिवार की आजीविका, स्थानीय पर्यावरण और ग्रामीणों को सुरक्षा भी प्रभावित हुई है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और पुलिस की जांच पर टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि गर्मी के मौसम में आसपास के ग्रामीण इस तालाब के पानी का उपयोग निस्तारी और अन्य दैनिक कार्यों के लिए करते हैं। वहीं कई मवेशी भी इस तालाब का पानी पीते हैं। ऐसे में यदि पानी में किसी विषैले रसायन की मौजूदगी पाई जाती है तो यह पशुओं और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य की टीम भेजकर जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबकि इस घटना का असर केवल इन्हीं मछलियों तक सीमित नहीं है। तालाब में रहने वाले केकड़, घोंघे, झींगा और अन्य जलीय जीव भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं। कई जलीय जीव मृत अवस्था में पानी की सतह पर दिखाई दिए। इससे स्थानीय जल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि पानी में किसी जहरीले पदार्थ का उपयोग किया गया है तो इसका दीर्घकालीन प्रभाव भी सामने आ सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार तालाब संचालक मोहन पटेल अपनी मेहनत से तैयार की गई मछलियों को मृत अवस्था में देखकर गहरे सदमे में आ गए। उनकी तबीयत बिगडऩे पर उन्हें उपचार के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है,जहां उनका इलाज जारी है।


