महासमुन्द
लोगों को दस्तावेजों में पटवारियों के हस्ताक्षर लेने के लिए चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 17 फरवरी। महासमुंद जिले के राजस्व अभिलेखों में डिजिटल हस्ताक्षर का कार्य 94 प्रतिशत पूरा हो गया है। इन अभिलेखों में पटवारियों के डिजिटल हस्ताक्षर होने के बाद लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। लोगों को दस्तावेजों में पटवारियों के हस्ताक्षर लेने के लिए चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। आमजनों को च्वाइस सेंटर से ऑनलाइन पटवारी के डिजिटल हस्ताक्षर सहित दस्तावेज मिल जाएंगे।
इससे जिन दस्तावेजों में पटवारियों के हस्ताक्षर लगते हैं, अब वहां हस्ताक्षर कराने की जरूरत नहीं होगी। इस कार्य को पूरा करने में राजस्व विभाग लगा हुआ है। इस कार्य को शत प्रतिशत करने में अब केवल 6 प्रतिशत काम बचा हुआ है।
इस संबंध में नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर एसके टंडन ने मीडिया को बताया कि जिले में पटवारियों के डिजिटल हस्ताक्षर का काम 94 प्रतिशत पूरा हो गया है। इस कार्य में महासमुंद प्रदेश के टॉप.5 स्थान पर है। हस्ताक्षर को शत-प्रतिशत करने का प्रयास किया जा रहा है। राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 12 लाख 29 हजार 597 खसरा है। इसमें 3 लाख 95 हजार 982 खाता है। डिजिटल हस्ताक्षर से सत्यापित खसरों की संख्या 11 लाख 63 हजार 796 है। यानी इस खसरा में पटवारी का डिजिटल हस्ताक्षर पूरा हो गया है। वहीं अब केवल 65801 खसरा शेष रह गया है। डिप्टी कलेक्टर ने बताया कि टॉप - 5 से हमारे जिले को टॉप थ्री में लाने का प्रयास जारी है।
पहले नंबर पर बिलासपुर जिला है। महासमुंद जिले के 65801 खसरों में डिजिटल हस्ताक्षर करना अभी भी शेष है। शेष कार्य को पूरा करने का प्रयास राजस्व विभाग के द्वारा किया जा रहा है। इसमें 27426 खाता है। इन अभिलेखों में भी यदि जल्द ही हस्ताक्षर हो जाएंगे तो इन खसरों के स्वामियों को पटवारियों के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
मालूम हो कि प्रदेश में राजस्व ऑनलाइन रिकॉर्ड को देखने के लिए भुईंया सॉफ्टवेयर बनाया गया है। पिछले साल अपडेट करने के बाद से साफ्टवेयर धीमी गति से चल रहा है। रफ्तार कम होने के कारण पटवारियों को ज्यादा दिक्कत होती है। इस तकनीकी समस्या के लिए लोग पटवारियों पर गुस्सा उतारते हैं। भले ही डिजिटल हस्ताक्षर का काम अधिक संख्या में हो चुका है। लोगों को पटवारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेेंगे। लेकिन जिस भुईयां कार्यक्रम के तहत यह काम हो रहा है उसका सॉफ्टवेयर कई बार डाउन रहता है। ऐसे में न लोगों को इसका फायदा मिलता है न पटवारियों को।
राजस्व विभाग का मानना है कि किसी भी नए व पुराने रिकार्ड की जानकारी एक क्लिक में मिलेगी। क्योंकि रिकॉर्ड अब ऑनलाइन हो गया है। लोगों को रिकॉर्ड निकालने में अब परेशानी नहीं होगी। पटवारी के डिजिटल हस्ताक्षर के साथ च्वाइस सेंटरों से रिकॉर्ड निकल जाएंगे। वहीं अधिकारियों को भी पुराने रिकॉर्ड निकालने में परेशानी नहीं होगी। सत्यापन, सीमांकन, आय, जाति, क्रय विक्रय के कागजात में पटवारियों के डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होते थे, डिजिटल हस्ताक्षर होने के कारण अब उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।


