महासमुन्द
बजबजाती नालियों की बदबू से ग्रामीण बीमार रहने लगे हैं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 7 फरवरी। यह तस्वीर किसी पहुंचविहीन अथवा सुदूर अंचल में बसे हुए गांव का नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय महासमुंद से महज 15 किलोमीटर और नगर पंचायत तुमगांव से 4 किलोमीटर दूर स्थित गांव का है। तस्वीर बताती है कि गांव का विकास किस हद तक हुआ है। सडक़, गली, सफाई, पानी निकासी के लिए नाली आदि से विहीन इस गांव के लोगों ने छत्तीसगढ़ को बताया कि गांव में नाली और गली निर्माण के लिए कई बार आंदोलन हुए लेकिन जनप्रतिनिधियों को काम नहीं कराना था, नहीं कराया। ग्रामीणों का आरोप तो यहां तक है कि इस गांव में पात्रों को पेंशन योजना और आवास योजना का भी लाभ नहीं मिलता है। यहां कक्षा पहली से 12 वीं तक का स्कूल है और सारे बच्चे इसी गंदगी को पार स्कूल आते जाते हैं।
गांव की बस्ती में घर बड़े करीने से बने हुए हैं। अधिकांश घरों में कुएं हैं। पीने के पानी के लिए दो चार बोरिंग भी है, लेकिन पानी निकासी का साधन नहीं है। घरों का गंदा पानी सडक़ पर बहता है इससे गलियों में गड्ढे ही गड्ढे हैं। सडक़ों के बीच बह रहीं नालियां गंदगी से लबालब हैं। बजबजाती नालियों की सड़ांघ से ग्रामीण बीमार रहने लगे हैं। लोगों को आवाजाही में बेहद परेशानी होती है। गांव वाले कहते हैं कि इस बार भी जनपद सदस्य ने अपने फंड से दूसरे पंचायत का विकास करा दिया। अगली बार जब राशि आएगी तब फिर से गांव विकास का मुद्दा रखेंगे वरना गांव वाले आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार बैठे हैं।
मालूम हो कि ग्राम पंचायत अछोला लगभग 5000 की जनसंख्या वाली पंचायत है। यहां विकास न होने से ग्रामीण अव्यवस्थाओं के बीच जीवन बसर कर रहे हैं। गलियों में जल निकासी का साधन नहीं है। चारों तरफ गंदगी और कूड़े के ढेर से आती दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर है। ग्रामीणों की समस्याएं कोई सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि राज के नेता चुनाव के समय दिखते हैं और चुनाव जीतने के बाद नजर ही नहीं आते हैं। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव की गलियों में हर समय जल भराव की समस्या बनी रहती है।
ग्राम सरपंच एवं समस्त पंचों वेद प्रकाश साहू, शिशुपाल बर्मन, मनीष साहू, तेज राम साहू पूर्व उपसरपंच, युवा नेता तरुण साहू, देवेन्द्र साहू, अभिशेक नेहरू, अशोक सेन, ओंकार साहू, विनेश मन्नाडे, दुष्यंत साहू, मदन साहू, प्रीतम साहू, प्रकाश सेन, चंद्रकांत साहू, रुपेश सेन समेत तमाम ग्रामीण कहते हैं कि गांव में विकास कार्योंं की बात आती है तो सबसे पहले जनप्रतिनिधि कमीशन की बात करते हैं। काम की बात बाद में होती है, ऐसे में विकास कैसे करें? बहरहाल गांव की स्थिति इनके आरोपों को सच साबित करती हुई सभी के सामने है।


