महासमुन्द
महासमुंद,13 अगस्त। बारिश नहीं होने से जिले के किसान चिंतित थे कि कल शाम अचानक बारिश शुरू हुई और देर रात जारी रही। किसानों के मुताबिक इस साल जितनी बारिश होनी चाहिए, नहीं हुई है। फसल चौपट होने की कगार पर थी। उन्हें बचाने किसान जद्दोजहद कर रहे थे। किसान आसपास भरे नाले, नहर, नाली, डबरी, तालाब व जलाशय के पानी को पाइप के माध्यम से दरार पड़े रहे खेतों तक पहुंचाने में जुटे हुए थे। जलाशयों से पानी की मांग अगस्त से शुरू हो गई थी।
मालूम हो कि जिले के 70 गांवों के किसान कोडार सहित विभिन्न जलाशयों से पानी छोडऩे की मांग कर रहे हंै। किसानों की स्थिति को देखते हुए जिला जल उपभोक्ता समिति ने शुक्रवार से पानी देने का निर्णय लिया था, लेकिन जलाशयों में पानी नहीं है। जिले के 102 जलाशयों में से 57 में 0 से 25 प्रतिशत भराव है। 25 से 50 प्रतिशत तक पानी भराव वाले 25 जलाशय है। 50 से 75 प्रतिशत तक वाले सात, 75 से 99 प्रतिशत वाले 5 जलाशय हैं। वैसे इस साल 1 अगस्त से 12 अगस्त तक 515 मिमी बारिश हुई है। पिछले साल इसी तारीख तक 103ण्4 मिली बारिश दर्ज की गई है।
1 अगस्त तक 2020 में 662.2 और12अगस्त 2020 तक 765.7 बारिश दर्ज की गई थी। इस साल कोडार जलाशय में अभी 15.2 फीट पानी भरा है। यानी 50 प्रतिशत जल का भराव हो गया है। वहीं केशवा में 18 फीट यानी करीब 45 प्रतिशत पानी भरा हुआ है। पिछले साल कोडार जलाशय में 21.50 फीट पानी भरा था।
सरायपाली ब्लॉक के घुरऊ व घोरघाटी जलाशय, बसना के रसोडा़, बागबाहरा के कसेकेरा व कछारडीह और महासमुंद ब्लॉक के बेलटुकरी मिनी जलाशय में शत प्रतिशत पानी भरा है। कहा जा रहा है कि इन्हीं जलाशयों से किसानों को पानी दिया जाएगा। कार्यपालन अभियंता कहते हैं कि केशवा जलाशय के पानी को निस्तारी के लिए फिलहाल संरक्षित कर रखा जाएगा। भराव अधिक होगा उसके बाद ही सिंचाई के लिए पानी देंगे।


