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ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए मिला सम्मान, कलेक्टर-सीईओ ने दी शुभकामनाएं
राजनांदगांव, 9 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साधवी निरंजन ज्योति ने वर्चुअल माध्यम से दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण आजीविका संभाग एमओआरडी द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में बेहतरीन कार्य करने के लिए राजनांदगांव जिले के ग्राम खुटेरी की जय मां दुर्गा महिला स्वसहायता समूह को सम्मानित किया।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साधवी निरंजन ज्योति ने सभी महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते कहा कि महिला घर और बाहर का कार्य दोनों एक साथ सफलतापूर्वक करती है। आज महिलाएं सभी रूप में आत्मनिर्भर बन रही है, जब हम मजबूत होंगे, तब सफलता पाने से हमें कोई नहीं रोक सकता, जिस परिवार में अभिभावक सबको साथ लेकर चलते हैं, वे परिवार हमेशा आगे की ओर अग्रसर होते हैं। हमें सबकी भावनाओं एवं विचारों का सम्मान करना चाहिए।
कलेक्टर टीके वर्मा और जिला पंचायत सीईओ अजीत वसंत से समूह की महिलाएं पुरस्कार मिलने के बाद भेंट की। कलेक्टर वर्मा ने समूह की महिलाओं को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी। कलेक्टर ने कहा कि समूह की महिलाएं अपनी सक्रियता एवं जागरूकता से समाज में परिवर्तन ला रही है। जिला पंचायत सीईओ श्री वसंत ने समूह की महिलाओं को शुभकामनाएं देते कहा कि महिला स्वसहायता समूह की सहभागिता से गांव की तस्वीर बदल रही है। गांव में महिलाएं जब जागरूक एवं आत्मनिर्भर होती हैं, इसके परिणाम स्वरूप ग्रामीण परिवेश में बदलाव आता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश के 30 महिला स्वसहायता समूह तथा 10 ग्राम संगठन को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। जिनमें से राजनांदगांव जिले के जय मां दुर्गा महिला स्वसहायता समूह को यह गौरव प्राप्त हुआ है। समूह की अध्यक्ष लोकेश्वर साहू हैं और सभी ने मिलकर रेडी टू ईट उत्पाद बनाने का कार्य शुरू किया। इसके लिए बैंक से, ग्राम संगठन से और सखी कलस्टर से ऋण लिया गया। समूह की महिलाओं ने 16 कुपोषित बच्चों को गोद लिया और वहीं उन्हें खिचड़ी, फल, दूध, मुर्रा लड्डू, चना एवं रेडी टू ईट से हलवा बनाकर खिलाया करते थे, जिनमें से 14 बच्चे अभी सुपोषित हो गए हैं।
श्रीमती चमेलाबाई साहू ने बताया कि पहले खेती-बाड़ी कार्य करते थे। आंध्रा की दीदी गांव में आई और उनके द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। शुरूआत में समूह के माध्यम से प्रत्येक से 10-10 रुपए की राशि जमा की गई और रेडी-टू-ईट बनाया गया। इससे आमदनी होना प्रारंभ हुआ। उन्होंने बताया कि प्रत्येक माह 2300 रुपए की आमदनी हो जाती है। अब खेती-बाड़ी के साथ-साथ अन्य कार्य भी करती है।


