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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 7 मार्च। दुर्ग जिले के ग्राम हसदा में खेतों के किनारे मानवीय आवास के नजदीक आम रास्ते पर एक ही जगह से 5 अजगरों को नोवा नेचर और वन विभाग द्वारा सुरक्षित बचाया गया। सभी अजगर की लंबाई 7 से 10 फीट के करीब थी। सभी अजगर को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान अजगर को देखने उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ को नियंत्रित करने पुलिस बल का भी सहयोग लिया गया।
ग्राम हरदा विकासखंड धमधा में खेतों में काम करते हुए स्थानीय ग्रामीणों को अजगर दिखाई दिया करता था। लेकिन शनिवार सुबह गाय-बकरी चराने वाले की नजर पड़ी कि यहां एक नहीं 5 की संख्या में अजगर दिखाई दे रहे हैं। देखते ही देखते सभी अजगर आसपास के जगह में विचरण करने लगे जो कि मानवीय आवास के काफी नजदीक है। यह देख सुरक्षा की दृष्टि से ग्रामीणों ने सरपंच की सहायता से वन विभाग को सूचना दी।
वन मंडल अधिकारी धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम तैयार कर जिसमें वन विभाग के रेंजर पीके विक्टर, वनरक्षक एसके मंडावी, त्रयंबक साहू के साथ नोवा नेचर के सदस्य अवध बिहारी, राम मुरारी, अजय कुमार हसदा की ओर रवाना हुए। हसदा गांव में भीड़ को नियंत्रण करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने थाने में सूचना दी।
हसदा ग्राम में एक ही स्थान पर पांच अजगर जिसकी लंबाई 7 से 10 फीट तक की होगी। यह देखने स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ होने लगी। थाना स्टाफ के पुलिस बल ने भीड़ को नियंत्रण किया, ताकि बचाव अभियान में कोई बाधा ना हो।
नोवा नेचर के सदस्यों ने वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर सभी पांच अजगर को स्वस्थ अवस्था में बचाया। सभी 5 अजगर को मानवीय पर्यावास से दूर उसके प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया। हसदा ग्रामवासियों ने सभी अजगर को सुरक्षित बचाने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़े जाने पर प्रसन्नता जाहिर की।
हसदा के सरपंच सियाराम साहू ने बताया कि खेत से सटे जगह पर बकरी गाय चराने आते हैं। स्थानीय ग्रामीण भी इसी रास्ते से जाते हैं। राह के किनारे एक साथ पांच अजगर के होने पर अजगर की सुरक्षा की दृष्टि से और ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ पशुओं की सुरक्षा के लिए अजगर को जंगल में छोड़ा जाना आवश्यक था।
सियाराम साहू ने बताया कि हमारे गांव में कोई भी सांपों को नहीं मारता। कोशिश की जाती है, उसे सुरक्षित पकड़वा कर उसके प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ दिया जाए। लेकिन इतनी संख्या में वह भी अजगर, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए अजगरों को सुरक्षित पकडक़र जंगल में छोड़ा गया।


