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केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह का विरोध किया
26-Feb-2021 12:38 PM
केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह का विरोध किया

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में समलैंगिक विवाह का विरोध किया है. रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने अदालत में हलफ़नामा दाख़िल कर कहा कि भारत में शादी एक संस्था के रूप में पवित्रता से जुड़ी हुई है. देश के प्रमुख हिस्सों में इसे एक संस्कार माना जाता है.

हलफ़नामे में केंद्र सरकार ने कहा, "हमारे देश में एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह के संबंध की वैधानिक मान्यता पुराने रीति-रिवाजों, प्रथाओं, सांस्कृतिक लोकाचार और सामाजिक मूल्यों पर निर्भर करती है."

केंद्र सरकार ने कहा कि समान सेक्स वाले व्यक्तियों के साथ यौन संबंध बनाने को पहले ही अपराध से बाहर कर दिया गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वो शादी कर सकते हैं.

हलफ़नामे में कहा गया है कि विपरीत लिंग के व्यक्तियों को ही विवाह की मान्यता देने में 'वैध राज्य हित' है.

केंद्र ने कहा कि एक ही लिंग के दो व्यक्तियों के बीच विवाह की संस्था की स्वीकृति को न तो मान्यता प्राप्त है और न ही किसी भी पर्सनल लॉ या किसी भी संवैधानिक क़ानूनों में इसे स्वीकार किया गया है.

केंद्र ने ये भी कहा कि समलैंगिक विवाह को वैध बनाना अदालत का काम नहीं है, उस पर निर्णय विधायिका को लेना होता है. हलफ़नामें में कहा गया है कि भारत में शादी केवल दो व्यक्तियों के मिलन का विषय नहीं है, बल्कि एक 'जैविक पुरुष और एक जैविक महिला के बीच एक गंभीर संस्थान है.'

केंद्र सरकार ने कहा है कि विवाह के मौजूदा क़ानून में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से देश में विभिन्न पर्सनल लॉ में जो संतुलन बना हुआ है उसमें उथल-पुथल मच जाएगा.

पिछले साल तीन याचिकाएं दायर की गईं थीं. उनमें से एक याचिका में डॉक्टर कविता अरोड़ा और अंकिता खन्ना ने अपने साथी चुनने के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित कराने की अपील की थी.

कविता और अंकिता ने दिल्ली में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने की अर्ज़ी दी थी लेकिन मैरिज ऑफ़िसर ने यह कहते हुए उनकी अर्ज़ी ख़ारिज कर दी थी कि वो दोनों समलैंगिक हैं.

इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

दूसरी याचिका पराग विजय मेहता और वैभव जैन ने दायर की थी. इन दोनों ने 2017 में वाशिंगटन में शादी की थी और फ़ॉरेन मैरिज एक्ट के तहत अपनी शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में अर्ज़ी दी थी जिसे दूतावास ने ख़ारिज कर दी थी.

तीसरी याचिका अभिजीत अय्यर मित्रा ने की थी और अपील की थी कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता दी जाए. (bbc.com)

अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख़ 20 अप्रैल को तय की है.


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