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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 11 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये की बेहिसाब सम्पति व मनी लॉड्रिग के आरोपी पूर्व आईएएस बाबूलाल अग्रवाल की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। जस्टिस आरसीएस सामंत की बेंच के इस फैसले के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बनाया है।
बीते 9 नवंबर 2020 को बाबूलाल अग्रवाल को प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर उप क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रेवेन्शन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट की धारा 3 के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत में जमानत अर्जी नामंजूर कर दी गई थी। हाईकोर्ट में अग्रवाल की जमानत अर्जी दायर की थी लेकिन बाद में उसे वापस ले ली थी। ईडी द्वारा चालान पेश किये जाने के बाद हाईकोर्ट में अग्रवाल ने दुबारा जमानत अर्जी लगाई। कोर्ट ने सम्बन्धित पक्षों को जनवरी माह में सुनने के बाद फैसला दिया और जमानत अर्जी बुधवार को मंजूर कर ली। प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ पांडेय ने कहा है कि उन्हें अभी कोर्ट के आदेश की प्रति नहीं मिली है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का मन बनाया है, हालांकि निर्णय आदेश की प्रति मिलने के बाद लिया जायेगा।
ईडी के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा था कि गिरफ्तारी के पूर्व से ही 39 करोड़ रुपये अर्जित करने का मामला अपीलीय कमेटी के समक्ष विचार के लिये लम्बित है। नवंबर में गिरफ्तारी के बाद 28 करोड़ रुपये के बेहिसाब सम्पत्ति का नया मामला सामने आया।
समाज कल्याण विभाग में एक हजार करोड़ रुपये के निःशक्त जन घोटाले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचने वाले कुंदन सिंह ठाकुर द्वारा भी इस मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर की गई थी। उनके अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने अग्रवाल को गंभीर किस्म का अपराधी बताते हुए जमानत का विरोध किया था।


