ताजा खबर

छत्तीसगढ़ के इकलौते सरकारी प्रेस को रायपुर स्थानांतरित करने की तैयारी
31-Jan-2021 12:37 PM
छत्तीसगढ़ के इकलौते सरकारी प्रेस को रायपुर स्थानांतरित करने की तैयारी

नांदगांव में विभागों को सिलसिलेवार हटाए जाने से लोगों में नाराजगी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 31 जनवरी।
बरसों से राजनांदगांव में स्थापित छत्तीसगढ़ राज्य के इकलौते सरकारी प्रिंटिंग प्रेस को राजधानी रायपुर में स्थानांतरित किए जाने की सुगबुगाहट से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पूर्व में राज्य सरकार के निर्देश पर तीन प्रमुख विभागों को दुर्ग शिफ्ट किया गया है। एडीबी-सेतु निगम व पाठ्य पुस्तक निगम के स्थानीय कार्यालय को दुर्ग में ले जाया गया है। 

बताया जा रहा है कि राजनांदगांव में संचालित विभागों को दुर्ग समेत दूसरे शहरों में ले जाने से लोग इस बात को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या राज्य सरकार एक विशेष अभियान के तहत राजनांदगांव की उपेक्षा कर रही है। पिछले कुछ महीनों में तीन प्रमुख विभाग हटाए जाने के बाद अब शासकीय प्रेस को राजधानी रायपुर में स्थानांतरित किए जाने की तैयारी चल रही है। 

1990 में राजनांदगांव में शासकीय प्रेस की स्थापना की गई है। प्रदेश सरकार के तमाम दस्तावेज और सरकारी कागजात की प्रिंटिंग यहीं होती है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से प्रेस पर कार्य का बोझ भी बढ़ा है। अविभाजित मध्यप्रदेश में ग्वालियर के बाद राजनांदगांव में सरकार ने शासकीय प्रेस की नींव रखी थी। कांग्रेस के दिवंगत नेता स्व. मोतीलाल वोरा ने इस प्रेस का शुभारंभ किया था।

बताया जा रहा है कि प्रेस को रायपुर स्थानांतरित किए जाने से सर्वाधिक असर कर्मचारियों पर पड़ेगा। कर्मचारियों को यहां लंबे समय से नौकरी करते हुए शहर में बसना पड़ा। कुछ सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्त के कगार पर हैं। ऐसे में रायपुर आवाजाही करने तथा स्थायी रूप से बसना कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। 

राजनांदगांव शहर के खैरागढ़ रोड में स्थित यह प्रेस करीब 10 एकड़ भूमि में स्थापित है। शासकीय मुद्रणालय प्रेस में 60 कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रेस को स्थानांतरित किए जाने को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर भी लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं। राजनीतिक रूप से भी इस निर्णय का विरोध भी हो सकता है। 

राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय भी सरकार के फैसले को लेकर कड़ा विरोध कर रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि जनता के साथ मिलकर इसका खुलकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति विभागों और संस्थाओं को राजनांदगांव से हटाए जाने को लेकर समझ से परे है। 

उधर महापौर श्रीमती हेमा देशमुख ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह एक भ्रामक खबर है। ‘छत्तीसगढ़’  से चर्चा में कहा कि कतिपय लोगों द्वारा भ्रम फैलाकर सरकार की छवि को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उच्च स्तर पर चर्चा के बाद यह साफ हुआ है कि शासकीय प्रेस को हटाए जाने का सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है। बहरहाल छत्तीसगढ़ के इकलौते सरकारी प्रेस को हटाए जाने को लेकर राजनीतिक स्तर पर जहां विरोध के स्वर फूट सकते हैं। वहीं आम लोग भी ऐसी हालत उत्पन्न होने पर खुला विरोध कर सकते हैं।

 


अन्य पोस्ट