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द टेलीग्राफ में छपी ख़बर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को जो बयान दिया, उससे संकेत मिलता है कि सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा से किसानों की साख पर उठे सवाल कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं और किसान आंदोलन दोबारा मज़बूत होता नज़र आ रहा है.
ख़बर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 150 से अधिक किसानों की धरने के दौरान हुई मौत के बावजूद प्रदर्शनकारी किसानों की तरफ़ हाथ नहीं बढ़ाया, लेकिन अब उनका रुख़ बदला हुआ लग रहा है.
कुछ समय पहले तक मोदी सरकार को लग रहा था कि किसान आंदोलन पंजाब केंद्रित है जिसे कुछ समर्थन हरियाणा से भी मिल रहा है. लेकिन अब सरकार के कान खड़े हो रहे हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होना है.
बीजेपी के भीतर कई लोगों को ऐसा लग रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश अब किसान आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन सकता है जो योगी आदित्यनाथ की सरकार के लिए अच्छी ख़बर नहीं होगी. (bbc.com)


