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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि परिवार न्यायालय के फैसले के अनुसार यदि कोई व्यक्ति भरण-पोषण की राशि प्रदान नहीं करता है तो उसके खिलाफ सीधे गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जा सकता। उससे राशि वसूली के लिये चल-अचल सम्पत्ति की कुर्की का वारंट जारी किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता कवर्धा के जगदम्बा त्रिवेदी का विवाह के बाद पत्नी से विवाद हुआ और वह अलग रहने लगी। परिवार न्यायालय ने 22 नवंबर 2018 को 7 हजार रुपये महीने भरण पोषण का आदेश जारी किया। बाद में याचिकाकर्ता से 38 हजार रुपये की वसूली के लिये गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। हाईकोर्ट में जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच ने गिरफ्तारी वारंट को निरस्त करते हुए आदेश दिया कि आईपीसी की धारा 125 (3) के अंतर्गत भरण पोषण की राशि की वसूली के लिये पहले चल अचल सम्पत्ति की कुर्की की नोटिस दी जाये। कुर्की से वसूली के बाद यदि कोई राशि शेष रह जाती है तब गिरफ्तारी की नोटिस दी जाये।


