ताजा खबर
68 साल के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को माइनस 14 डिग्री तापमान में राजधानी मॉस्को के पास एक क्रॉस-शेप्ड पुल में नंगे बदन डुबकी लगाई.
बर्फ़ीले पानी में पुतिन की डुबकी लगाती तस्वीर राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट की गई है. पुतिन पुल तक शीपस्किन ओवरकोट में आते हैं लेकिन डुबकी लगाते हुए वो केवल अंडरवियर में हो जाते हैं.
रूस में टीवी पर इसका वीडियो भी दिखाया गया. पुतिन ने इस बर्फ़ीले पानी वाले पुल में तीन बार डुबकी लगाई. इस पुल के चारों तरफ़ बर्फ़ जमी है.
दरअसल, पुतिन एक धर्मनिष्ठ ईसाई के अनुष्ठान का पालन कर रहे थे. इस दिन को फीस्ट डे या इपिफ़नी कहा जाता है. हर साल एपिफ़नी के दिन धर्मनिष्ठ ईसाई नदी और झील में डुबकी लगाकर ईसा मसीह को याद करते हैं.
The President took a traditional dip to mark Epiphany https://t.co/lv9e1WnUlp pic.twitter.com/BxnXa4qcDY
— President of Russia (@KremlinRussia_E) January 19, 2021
इस डुबकी को बहुत पवित्र माना जाता है. पुतिन कम्युनिस्ट शासन में पले-बढ़े हैं लेकिन राष्ट्रपति के तौर पर वो एक धर्मनिष्ठ ईसाई के रूप में रहे हैं.
इपिफ़नी के मौक़े पर लोग पारंपरिक रूप से नज़दीकी नदी या तालाब में जाकर बर्फ़ीले पानी में डुबकी लगाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इपिफ़नी की मध्य रात्रि पर सारा पानी पवित्र हो जाता है, जिससे हर तरह के पाप धुल जाते हैं.
रूसी मीडिया में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लंबे समय से एक दबंग नेता के रूप में दिखाया जाता है जो रूस को पश्चिमी दुनिया से बचाते हैं. लेकिन अब रूसी मीडिया में उनकी छवि एक मसीहा के रूप में गढ़ी गई है.
देश के सबसे बड़े सरकारी चैनल रोसिया 1 पर 2018 में एक डॉक्यूमेन्ट्री चलाई गई थी. ये डॉक्युमेंट्री वलाम नाम के एक मठ से जुड़ी है जो उत्तर में मौजूद झील लादोगा के नज़दीक एक द्वीप पर स्थित है.
इसे पुतिन का पसंदीदा स्थान माना जाता है. इस डॉक्युमेंट्री में दिखाया गया था कि पुतिन के नेतृत्व में सोवियत संघ सैन्य नास्तिकता के दौर से वापस आस्था के दौर में लाया गया है. (bbc)


