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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 5 दिसम्बर। राज्य सरकार द्वारा नियमों में संशोधन कर गठित की जा रही साख व सहकारी समितियों की वैधता को हाईकोर्ट ने इसे लेकर दायर याचिका के अंतर्गत बाधित कर दिया है। राज्य सरकार से कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिये भी कहा है।
छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों का गठन छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के अंतर्गत होता रहा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक व साख सोसाइटियों के पुनर्गठन के लिये 25 जुलाई 2019 को एक संशोधन किया था। इसे पुनर्गठन योजना 2019 के नाम से जारी किया गया। इसके अंतर्गत सोसाइटियों को संचालित करने के सभी अधिकार उप, सहायक रजिस्ट्रार व रजिस्ट्रार को दे दिया गया था। महासमुंद सहित कुछ अन्य जिलों में इस नये अधिनियम से सोसाइटियों का गठन भी किया गया। इसके खिलाफ सहकारी सोसाइटियों के कुछ संचालकों की ओर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
हाईकोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार करने के बाद जुलाई 2020 में राज्य सरकार ने कंडिका 8 को विलोपित कर दिया था जिसमें सहायक रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार के अधिकार बढ़ाये गये थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कंडिका 8 के अलावा कंडिका 5 में भी पुनर्गठन की नई प्रक्रिया जोड़ी गई है। इसका पालन नई सोसाइटियों का गठन करते समय नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई आपत्ति को लेकर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य सरकार तीन सप्ताह के भीतर इस पर जवाब दाखिल करे। साथ ही कहा कि नई सोसाइटियों का गठन इस याचिका के निराकरण के अंतर्गत बाधित रहेगा।


