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अंकिता भंडारी हत्या मामला: सीबीआई जाँच की सिफ़ारिश के बाद भी उत्तराखंड क्यों बंद रहा
12-Jan-2026 9:09 AM
अंकिता भंडारी हत्या मामला: सीबीआई जाँच की सिफ़ारिश के बाद भी उत्तराखंड क्यों बंद रहा

-आसिफ़ अली

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्या मामले को लेकर रविवार को विभिन्न राजनीतिक संगठनों की ओर से बंद बुलाया गया था. राज्य में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला.

यह बंद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जाँच की माँग को लेकर बुलाया गया था.

राज्य में बंद का कहीं पूरा तो कहीं आंशिक असर देखने को मिला. कई क्षेत्रों में बाज़ार बंद रहे, जबकि कुछ स्थानों पर सामान्य गतिविधियां जारी रहीं.

कांग्रेस, उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड क्रांति दल सहित विभिन्न संगठनों और लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की.

अंकिता भंडारी हत्या मामले में पारदर्शी सीबीआई जाँच और 'वीआईपी कौन था?' जैसी माँगों के साथ लोग सड़कों पर उतरे.

उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने बंद को सफल बताया.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "आज के बंद का ख़ास मक़सद यह था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई की जाँच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, जिसका सरकार ने उल्लेख नहीं किया है. इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जाँच की संस्तुति दिए जाने के बाद भी बंद का आह्वान जारी रखा गया."

उन्होंने कहा, "वीआईपी का मुद्दा सीबीआई की जाँच के केंद्र में होना चाहिए. साथ ही वनंतरा रिसॉर्ट से साक्ष्य मिटाने वाले भी सामने आने चाहिए."

कांग्रेस पार्टी ने बंद को पूर्ण समर्थन और सहयोग दिया. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "गढ़वाल में बंद पूरी तरह सफल रहा, जबकि कुमायूँ में इसका आधा-आधा असर देखने को मिला. देहरादून में आंशिक रूप से बाज़ार खुले रहे."

गरिमा मेहरा ने कहा, "इस बंद के ज़रिए हमने यह बताने की कोशिश की है कि इस मामले में न्याय पूरा चाहिए, न कि अधूरा. क्योंकि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं वे सत्तारूढ़ दल से हैं और सीबीआई भी केंद्रीय एजेंसी है जहां भाजपा की सरकार है."

उन्होंने कहा, "बहुत संभावना है कि रसूखदार लोग जांच को प्रभावित कर सकते हैं. सीबीआई की जांच 'वीआईपी' को केंद्र में रखकर किए जाने की आवश्यकता है."

संयुक्त संघर्ष मंच से जुड़े मोहित डिमरी ने कहा कि सभी संगठनों ने एक स्वर में स्पष्ट किया है कि जब तक अंकिता भंडारी हत्या की जाँच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई से नहीं कराई जाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा. (bbc.com/hindi)


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