ताजा खबर

वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन नहीं रहे, अंतिम संस्कार अभी तय नहीं
02-Dec-2020 9:06 PM
वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन नहीं रहे, अंतिम संस्कार अभी तय नहीं

कैंसर से महीनों लड़ते हुए भी लिखते रहे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 2 दिसंबर।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के एक सबसे वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का आज शाम दिल्ली में निधन हो गया। वे देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक थे और पिछले कुछ महीनों से दिल्ली में उनका कैंसर का इलाज चल रहा था। दो दिन पहले उन्हें बे्रन हैमरेज हुआ, और उनकी हालत बिगड़ती चली गई।

ललित सुरजन पिछली आधी सदी से अधिक समय से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय थे, और अपने आखिरी दिनों तक उन्होंने लिखना जारी रखा था। अखबार, पत्रिका के संपादन के अलावा वे संस्कृति, साहित्य, समाज और अनेक मुद्दों से जुड़े हुए आंदोलनों में लगातार सक्रिय रहते थे। वे अपने पत्र समूह के संचालक होने के साथ-साथ लगातार लिखने वाले एक सक्रिय पत्रकार के रूप में जाने जाते थे।

ललित सुरजन के अंतिम वक्त उनका परिवार उनके साथ था और अभी कुछ देर पहले ही सार्वजनिक रूप से इसकी पहली सूचना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट करके दी। उन्होंने लिखा- प्रगतिशील विचारक, लेखक, कवि और पत्रकार ललित सुरजनजी के निधन की सूचना ने स्तब्ध कर दिया है। आज छत्तीसगढ़ ने अपना एक सपूत खो दिया। साम्प्रदायिकता और कूपमंडूकता के खिलाफ देशबंधु के माध्यम से जो लौ मायाराम सुरजनजी ने जलाई थी उसे ललित भैया ने बखूबी आगे बढ़ाया। पूरी जिंदगी उन्होंने मूल्यों को लेकर कोई समझौता नहीं किया। ललित भैया को मैं छात्र जीवन से जानता था और राजनीति में आने के बाद समय-समय पर मार्गदर्शन लेता रहता था।

भूपेश बघेल ने कहा- वे राजनीति पर पैनी नजर रखते थे और उनकी लोकतंत्र पर गहरी आस्था थी। नेहरूजी के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा मुझे प्रेरित करती थी। उनके नेतृत्व में देशबंधु ने दर्जनों ऐसे पत्रकार दिए हैं जिन पर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों को गर्व हो सकता है।

मायाराम सुरजन के शुरू किए हुए पत्र समूह को ललित सुरजन ने अपने छात्र जीवन से ही आगे बढ़ाना शुरू किया था। अपने पिता की तरह वे भी वामपंथी राजनीतिक रूझान के थे, और वामपंथी विचारधाराओं वाले बहुत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रिय रहते थे। वे साहित्य और संस्कृति से जुड़े हुए बहुत से आंदोलनों में सक्रिय हिस्सेदारी रखते थे। अखबार के संचालक होने के बावजूद जब-जब पत्रकारिता पर कोई हमला होता था तो पत्रकारों के संगठनों में पहुंचकर वे शरीक होते थे। वे रोटरी क्लब में हमेशा सक्रिय रहे और उसके डिस्ट्रिक्ट गर्वनर भी रहे।

उन्होंने दुनिया के बहुत से देशों का दौरा किया था, और वे लगातार इन जगहों के बारे में लिखते भी रहते थे। पत्रकारिता के उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए वे ब्रिटेन के थॉमसन फाउंडेशन में भी चुने गए थे। छत्तीसगढ़ में वे पत्रकारिता विभाग में छात्रों के बीच पढ़ाने में भी सक्रिय रहते थे।

उनके परिवार में पत्नी श्रीमती माया सुरजन के अलावा उनके चार भाई और दो बहनें भी हैं। उनकी तीन बेटियां और दामाद भी उनके आखिरी वक्त भाई-बहनों के साथ-साथ उनके करीब थे।

अभी रात 9 बजे यह समाचार लिखे जाने तक उनके अंतिम संस्कार के बारे में किसी फैसले की खबर नहीं मिली है।

छत्तीसगढ़ और देश के बहुत से मीडिया संस्थानों में काम करने वाले कामयाब और प्रतिभाशाली पत्रकार उनके मातहत काम करते हुए आगे बढ़े। गिरिजाशंकर, दिवाकर मुक्तिबोध, विनोद वर्मा, रूचिर गर्ग, निधीश त्यागी, सुदीप ठाकुर, संदीप सिंह ठाकुर, राजेश जोशी, आलोक पुतुल, जैसे बहुत से पत्रकार देशबंधु अखबार से ही आगे बढ़े। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक अन्य सलाहकार प्रदीप शर्मा भी देशबंधु में काम कर चुके हैं। वहां से निकले हुए बहुत से पत्रकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में कामयाब पत्रकार रहे।

इस अखबार ‘छत्तीसगढ़’ के संपादक सुनील कुमार ने भी करीब तीन दशक उनके मातहत काम किया था।

ललित सुरजन की अगुवाई में देशबंधु अखबार को पत्रकार तैयार करने का स्कूल माना जाता था।


अन्य पोस्ट