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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 2 दिसंबर। प्रदेश के सुदुर अंचल जहां नेटवर्क और अन्य तकनीकी कारणों से नीट क्वालिफाई विद्यार्थी, जो काउंसलिंग के लिए निर्धारित समय पर अपना पंजीयन नहीं करा सके थे उन्हें अब प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में पेमेंट सीट पर प्रवेश दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस आशय के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि दंतेवाड़ा जिले के 27 विद्यार्थियों ने नीट क्वालिफाई किया है किन्तु नेटवर्क समस्या के चलते उनका प्रथम काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया था।
बताया गया कि आदिवासी इलाकों के इन विद्यार्थियों का भविष्य अब सरकार संवारेगी। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद यह पहली बार है कि एमबीबीएस के लिए निजी कॉलेजों के पेमेंट सीट में बच्चों को राज्य सरकार के खर्च पर दाखिला दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि किसी भी बच्चे के भविष्य के साथ कोई समझौता नही होना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदेश के दूरस्थ आदिवासी अंचलों के ऐसे सभी होनहार बच्चों के एमबीबीएस मेें दाखिला के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संज्ञान में जैसे ही यह बात आई कि दंतेवाड़ा जिले के 27 होनहार छात्र-छात्राएं जिन्होंने नीट क्वालिफाई किया है परन्तु नेटवर्क प्राब्लम के चलते प्रथम काउंसलिंग में उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका था।
इस सिलसिले में जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर पंजीयन कराने का प्रयास किया गया और राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय काउंसलिंग पूर्व इनका रजिस्ट्रेशन कराया गया परंतु ये छात्र चयन से वंचित रह गए। राज्य में पंजीयन हेतु द्वितीय अवसर नहीं होने से उनका पंजीयन नहीं कराया जा सका। प्रथम काउंसलिंग के पश्चात इसमें दो छात्रा कुमारी पदमा मडे और पीयूषा बेक एमबीबीएस में प्रवेश की पात्रता रखती हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर दंतेवाड़ा द्वारा इन विद्यार्थियों का प्रदेश के निजी कॉलेजों में दाखिला की कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आगे भी यदि इनमें से कोई छात्र कटअप के बाद प्रवेश के लिए पात्र पाया जाता है तो उन्हें भी निजी कॉलेजों की पेमेंट सीट पर दाखिला दिलाया जाएगा और इसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।


