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अखिल भारतीय सेवा, कानून से ऊपर
19-Nov-2020 12:12 PM
अखिल भारतीय सेवा, कानून से ऊपर

फोटो और टिप्पणी सत्यप्रकाश पाण्डेय द्वारा
इस अफसर को यकीनन नियम-कायदों से कोई सरोकार नहीं होगा, निजी वाहन पर पदनाम लिखी हुई बिना नंबर की यह स्कार्पियो आपको शहर के अलावा बिलासपुर-कोटा मार्ग पर अक्सर नजर आ जाएगी। किसी डीएफओ की निजी गाड़ी है, आगे-पीछे छत्तीसगढ़ शासन भी लिखा हुआ है। सरकार के यातायात नियमों को जंगल के किसी कोने में टांगकर बेखौफ घूमते इस अफसर की नैतिकता और कत्र्तव्यपरायणता पर भी विचार किया जाना चाहिए। कायदे-कानून की अक्सर दुहाई देने वाले अधिकांश अफसर अपने निजी वाहनों पर पदनाम और छत्तीसगढ़ शासन लिखवाकर घूमते हैं। नियमत: ये गलत है लेकिन देखेगा कौन ? कुछ साहबों के बच्चे स्कूल, कोचिंग क्लास और खेल मैदान जाने के लिए सरकारी वाहनों का ड्राइवर सहित इस्तेमाल करते हैं तो कुछ साहबों की मैडमों को बाजार की चकाचौंध के बीच सरकारी खर्च पर इतराते-इठलाते देखा जा सकता है।
   
चूँकि बिलासपुर शहर में यातायात नियमों की किताब सिर्फ और सिर्फ आम जनमानस के लिए खोली जाती है। ऐसे में किस वर्दीधारी की हिम्मत है जो किसी अफसर या फिर रसूखदार के वाहन को रोक ले ? वैसे तो बिना नंबर और चंद रूपये के सायरन वाहन में लगाकर गली-मोहल्ले के असामाजिक तत्व भी सडक़ पर होंय-होंय करते नजर आ जाएंंगे, ऐसे में वन महकमे का यह अफसर आखिर किस मुगालते में सडक़ पर फर्राटे भरता है ? (सत्यप्रकाश पाण्डेय की इस पोस्ट के बाद बिलासपुर के आईजी दीपांशु काबरा ने इसके जवाब में लिखा है कि वे कार्रवाई करने के लिए निर्देश दे रहे हैं)

रायपुर में ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता ने वन विभाग के मुख्यालय, अरण्य भवन में ऐसी कई गाडिय़ां देखी हैं जो कि नंबर प्लेट की जगह अफसर का ओहदा सजाकर चलती हैं। पहले सत्तारूढ़ पार्टी के अराजक लोग ही ऐसा करते थे, अब अफसर भी उसी पर उतर आए हैं।


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