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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 नवंबर। अभनपुर के केंद्री गांव में कल जिन पांच लोगों की मौत हुई है, इसमें से मजदूर युवक की मां, पत्नी व उसके दोनों बच्चों की गला दबाकर हत्या की गई है। मजदूर युवक ने खुद फांसी लगाकर अपनी जान दी है। पुलिस को बीती शाम-रात मिले शार्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। पोस्टमार्टम के बाद सभी का शाम को गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत का कारण-बीमारी और आर्थिक तंगी बताई जा रही है।
एएसपी (ग्रामीण) तारकेश्वर पटेल का कहना है कि घटना के बाद सभी पांच शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। उन्हें शार्ट पीएम रिपोर्ट मिल गई है, जिसमें मजदूर युवक के फांसी लगाकर आत्महत्या और बाकी चारों की गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। पुलिस का मानना है कि मजदूर युवक ने अपनी मां, पत्नी व दोनों बच्चों की गला घोटकर हत्या करने के बाद खुद फांसी पर झूल गया। फिर भी पुलिस, घटना की अलग-अलग ढंग से जांच में लगी है। फिलहाल और कुछ जानकारी सामने नहीं आई है।
अभनपुर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद शाम को सभी शवों का गांव में अंतिम संस्कार करा दिया गया। गांव में मृतक कमलेश साहू का दूर का एक चाचा रहता है। इसके अलावा बस्ती में उसके और कोई करीबी रिश्तेदार नहीं हैं। कमलेश अपने तीन भाईयों में एक था और वह लगातार मानसिक रूप से बीमार चल रहा था। उसकी पत्नी प्रमिला भी बीमार रहती थीं। दोनों पति-पत्नी रोजी-मजदूरी कर अपना घर चला रहे थे। इस बीच हो सकता है कि उनके सामने आर्थिक समस्या आई होगी। पूरी पीएम रिपोर्ट सामने आने पर और भी जानकारी सामने आएगी। पुलिस जांच जारी है।
हृदय विदारक, उत्सव के हिसाब
से प्रदेश में विकास नहीं-कौशिक
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि केन्द्री गांव की घटना हृदय विदारक है और सभी के दिल को दहला देने वाली है। प्रदेश में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला चल पड़ा है। कमलेश साहू द्वारा पूरे परिवार की हत्या और फिर आत्महत्या करना और सुसाइड नोट में यह बताना कि पत्नी के इलाज के लिए पैसे नहीं है। आर्थिक तंगी और उसके पास कोई काम भी नहीं है, गरीबी को बता रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि जिस प्रकार से राज्य सरकार, प्रदेश में उत्सव मना रही है, उस हिसाब से यहां विकास नहीं हुए हैं। प्रदेश में किसान, मजदूर और युवा आत्महत्या की ओर प्रेरित हो रहे हैं। केन्द्री गांव के किसान ने अपने पूरे परिवार के साथ अपनी इहलीला समाप्त कर ली है, जो सोचनीय विषय है। केन्द्र सरकार एवं रमन सरकार द्वारा गरीबों के इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड योजना शुरू की गई थी, जिसे यहां बंद कर दिया गया। आयुष्मान योजना का लाभ लोगों नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गरीब अपना इलाज कैसे कराएं। उनका मानना है कि इस घटना से पूरा प्रदेश शर्मिंदा है और यह राज्य सरकार के लिए सोचनीय विषय है।


