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किसान सभा द्वारा पंजाब में जरूरी सामान आपूर्ति और दिल्ली रैली रोकने के प्रयास की निंदा
12-Nov-2020 2:20 PM
किसान सभा द्वारा पंजाब में जरूरी सामान आपूर्ति और दिल्ली रैली रोकने के प्रयास की निंदा

फाईल फोटो


कृषि विरोधी कानून का विरोध, राष्ट्रपति को ज्ञापन

रायपुर, 12 नवंबर। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने पंजाब में खाद, कोयला और अत्यावश्यक सामानों की आपूर्ति रोके जाने और मोदी सरकार के कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसान संगठनों की 26-27 नवम्बर की दिल्ली रैली की अनुमति न देने की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति के खिलाफ किसान संघर्ष करेंगे और सरकार को अपना कृषि विरोधी कानून वापस लेने के लिए बाध्य करेंगे।

किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋ षि गुप्ता ने जारी एक बयान में कहा है कि हरित क्रांति के दौर से ही पंजाब देश की खाद्यान्न सुरक्षा की रक्षा करता आया है और यही वह एकमात्र राज्य है, जहां पूरा गेहूं और धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। सरकार अब कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे पंजाब के किसानों का दमन करने के लिए अत्यावश्यक सामानों की आपूर्ति रोक रही है, जो उसकी बदले की भावना को ही दिखाता है, जबकि पंजाब के किसान केवल यात्री ट्रेनों को ही रोक रहे हैं। मोदी सरकार के इस रूख के खिलाफ पूरे देश से राष्ट्रपति को मेल से ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है। पंजाब के संघर्षरत किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए किसान सभा ने भी आज राष्ट्रपति को मेल से ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताया है। 

उन्होंने बताया कि देश के 400 से ज्यादा किसान संगठनों ने 26-27 नवम्बर को इन किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन और दिल्ली में अखिल भारतीय रैली आयोजित करने की घोषणा की है। लेकिन, पुलिस दिल्ली रैली की अनुमति देने से इंकार कर रही है। दिल्ली पुलिस के ऐसे गैर-कानूनी प्रयासों का मुकाबला किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा है कि कृषि-व्यापार करने वाली कॉर्पोरेट कंपनियों को खुश करने के लिए ही किसान विरोधी तीन कानून बनाए गए हैं, जिसमें किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने को भी तय नहीं किया गया है। किसान संघर्ष समन्वय समिति ने इस पर कानून का जो प्रारूप तैयार किया था, उसे सरकार द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया। देश के किसान पिछले दो महीने से इन कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और वे सभी इन कानूनों के निरस्त होने तक आगे संघर्ष करेंगे।


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