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नागरिक संघर्ष समिति की मांग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 5 नवंबर। छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति ने कोरोना महामारी को देखते हुए दिवाली एवं 31 दिसंबर नववर्ष पर पटाखों की बिक्री और फोड़े जाने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग राज्य सरकार से की है।
समिति के अध्यक्ष विश्वजीत मित्रा ने इस संबंध में राज्य सरकार और पर्यावरण संरक्षण मंडल को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश के ज्यादातर जिलों में कोराना महामारी का प्रकोप बना हुआ है और रोज नए मरीजों की संख्या घट-बढ़ रही है। साथ ही मृतकों की संख्या में भी उतनी कमी नहीं आई है। लॉकडाउन से अनलॉक प्रक्रिया के बाद पीएम 2.5, पीएम 10 तथा अन्य जहरीले प्रदूषकों का स्तर आश्चर्यजनक रूप से पूर्व की तरह बढ़ा हुआ है। कोरोना महामारी से स्वस्थ्य हो चुके मरीजों के फेफड़े कमजोर हो चुके हैं।
उन्होंने कहा है कि कोराना एक जानलेवा संक्रमण है, जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और क्षति पहुंचाता है। ऐसे में दिवाली तथा 31 दिसंबर की रात को फोड़े जाने वाले पटाखों से वायुमंडल में प्रदूषण होगा। इसका बुरा असर कोरोना संक्रमण को बढ़ावा देगा एवं अस्थमा, सीओपीडी या एलर्जिक रहाइनिटिस से पीडि़त मरीजों की समस्या बढ़ा देगा। पटाखों से जहरीले गैस का निकलना स्वाभाविक है, जिसमें कार्बन डाय ऑक्साइड, मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैस निकलती है, जिससे फेफड़े को क्षति पहुंचती है और शरीर को ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती है, जो शरीर के भीतरी सभी महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंचाएगा। ऐसे में कोरोना महामारी को देखते हुए दिवाली से पूर्व एवं 31 दिसंबर तक पटाखों की बिक्री एवं फोड़े जाने पर रोक लगाई है।
प्रदूषण, स्वास्थ्य के लिए
नुकसानदायक-डॉ. नागरकर
एम्स निदेशक डॉ. नितिन एम नागरकर का कहना है कि पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण की समस्या सामने आती है और यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए जरूर नुकसानदायक रहता है। खासकर कोरोना के चलते हम सभी को इस प्रदूषण से दूर रहना होगा। इस प्रदूषण से सांस, छाती संबंधी दिक्कत सामने आती है। हमारा प्रयास हो कि इन प्रदूषणों से दूर रहें।


